PM Modi 25 years: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक सेवा में 25 साल पूरे होने के मौके पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जनता ने उन्हें 25 साल पहले सेवा के लिए चुना था और जिंदगी भर वो इसके लिए सर्वस्व झोंकते रहेंगे. इस दौरान उन्होंने युवा पीढ़ी खासकर जेनजी को संबोधित करते हुए 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए We Will Do It का नारा दिया. इसके अलावा, पीएम मोदी ने गुजरात से लेकर केंद्र की सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार की उपलब्धियों को भी सामने रखा.
25 साल का जनता का भरोसा
दरअसल, बुधवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 25 वर्षो के दौरान कितने चुनाव हुए. जनता ने हमेशा मुझे उनकी सेवा के लिए चुना था. आज मैं जो कुछ और जहां भी हूं, उसमें सबसे बड़ा योगदान जनता का ही है. देश के हर नागरिक का उन पर सबसे बड़ा हक है. ये 25 साल का जनता का विश्वास और 25 साल का अनुभव ही उनकी पूंजी है. ये पूंजी देश की है. हम मानवता के सेवक हैं. आज का ये दिन सिर्फ यादों के लिए नहीं है. ये दिन उस वादे को दोहराने का दिन है. उस इरादे को जताने का दिन है, जो कहता है कि हम करके रहेंगे. we will do it .
देश को टॉप 3 इकोनॉमी में लाएंगे
उन्होंने कहा कि लाल किले से सबका साथ सबका प्रयास की बात की थी. भारत को नई बुलंदियों पर पहुंचाने के लिए जो जोश जो जज्बा चाहिए वो एक ही संदेश देता है. हम करके रहेंगे. हम भारत को दुनिया की टॉप 3 इकोनॉमी में लगाएंगे. आत्मनिर्भर भारत के साथ उसे वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाएंगे. ओलंपिक का आयोजन करने के साथ अंतरिक्ष में कदम रखेंगे. पीएम मोदी ने कहा कि सरकार के मुखिया के तौर पर 25 वर्षों की ये निरंतर यात्रा मेरे लिए व्यक्ति के महिमामंडन का विषय नहीं है न ही ये गर्व है. उन्हेंने कहा कि आज से 25 साल पहले 50 वर्ष की आयु में जंगलों में आदिवासियों की सेवा करते करते गुजरा, पहाड़ों में जिंदगी बिताई और भारतीय जनता पार्टी में संगठन के रास्ते मेरा राजनीतिक रिकॉर्ड सिर्फ संगठन के काम करने वाले का था.
वडनगर की घटना याद दिलाई
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि मुझे याद है कि जब मैं वडनगर के स्कूल में पढ़ने जाता था, तब हमारे मास्टर जी तरह-तरह के पाठ पढ़ाते थे और क्लास में सबसे पहले पहुंचने वाले छात्र में हमेशा मेरा नाम होता था. सीखने की वो ललक मेरे जीवन का हिस्सा बन गई और मैं आज भी स्वयं को एक विद्यार्थी ही मानता हूं. हर दिन कुछ नया सीखने का प्रयास करता हूं. उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर, 2001 को जब मैंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब सोचा नहीं था कि कभी ये पड़ाव भी आएगा. आज शासन के प्रमुख के तौर पर निरंतर सेवा करने के साथ मेरे 25 वर्ष पूरे हो गए हैं.

