दिल्ली की हवा फिर हुई जहरीली! AQI 179 से उछलकर 227 पर पहुंचा, सांस के मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी

Divya Rai
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Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Delhi Air Pollution: दिल्ली में सर्दियों की आहट के साथ ही वायु प्रदूषण का असर दिखने लगा है. बुधवार, 21 अक्टूबर की सुबह राजधानी की हवा इस सीजन में पहली बार खराब श्रेणी में दर्ज की गई. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह 7 बजे दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 227 रहा. इससे पहले अक्टूबर की शुरुआत से मंगलवार तक हवा की गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई थी.

मंगलवार को दशहरे के मौके पर शहर के कई इलाकों में रावण के पुतले जलाए गए और पटाखे भी फोड़े गए. इसके बाद रात के दौरान वायु गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई. मंगलवार शाम 4 बजे दिल्ली का AQI 179 था, लेकिन रात 2 बजे तक यह 200 के पार पहुंच गया. बुधवार सुबह भी प्रदूषण का स्तर खराब श्रेणी में बना रहा.

AQI 200 के पार, जानिए किस स्तर पर कितनी खराब होती है हवा

CPCB के मानकों के अनुसार, वायु (Delhi Air Pollution) गुणवत्ता सूचकांक को छह श्रेणियों में बांटा गया है. इससे हवा में प्रदूषण के स्तर और स्वास्थ्य पर उसके संभावित असर का अंदाजा लगाया जाता है.

  • 0 से 50: अच्छा
  • 51 से 100: संतोषजनक
  • 101 से 200: मध्यम
  • 201 से 300: खराब
  • 301 से 400: बहुत खराब
  • 401 से 500: गंभीर

दिल्ली में AQI का 227 तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि हवा की गुणवत्ता बिगड़ रही है. इससे पहले इसी साल 12 और 13 जुलाई को भी राजधानी में AQI खराब श्रेणी में दर्ज किया गया था. उस दौरान सूचकांक क्रमशः 261 और 246 रहा था.

बच्चों और बुजुर्गों को हो सकती है ज्यादा परेशानी Delhi Air Pollution

खराब होती हवा का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से हृदय या सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ सकता है. प्रदूषित हवा में मौजूद पीएम2.5 और पीएम10 जैसे सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं. इनमें से छोटे कण फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं. इनके संपर्क में आने से खांसी, गले में जलन, सांस लेने में परेशानी और अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं. लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से हृदय और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है. ऐसे में संवेदनशील लोगों को प्रदूषण के स्तर पर नजर रखनी चाहिए. अगर बाहर निकलने पर सांस लेने में परेशानी या अन्य लक्षण महसूस हों, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है.

ठंड बढ़ने पर क्यों बिगड़ती है दिल्ली की हवा?

दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण होते हैं. तापमान में गिरावट और हवा की गति धीमी होने से वातावरण में मौजूद धूल और धुएं के कण आसानी से बिखर नहीं पाते. कई बार ये प्रदूषक जमीन के करीब ही जमा रहने लगते हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता और खराब हो जाती है. इसके अलावा, उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली हवाएं भी दिल्ली के प्रदूषण स्तर को प्रभावित कर सकती हैं. पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं अनुकूल मौसमी परिस्थितियों में दिल्ली-एनसीआर तक पहुंच सकता है. हालांकि, राजधानी के प्रदूषण के लिए केवल पराली जलाना जिम्मेदार नहीं है. वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और कचरा जलाने जैसी गतिविधियां भी इसमें योगदान देती हैं.

पंजाब में बढ़ीं पराली जलाने की घटनाएं

खेतों में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं ने भी प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ा दी है. ICAR-IARI के CREAMS सिस्टम और संबंधित राज्य एजेंसियों के आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में 18, 19 और 20 अक्टूबर के दौरान खेतों में आग लगने की घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 20 अक्टूबर तक पंजाब में पराली जलाने की कुल घटनाओं की संख्या 404 हो गई थी. इनमें मंगलवार, 20 अक्टूबर को दर्ज किए गए 36 नए मामले भी शामिल थे. हरियाणा में पराली जलाने की कुल 9 घटनाएं दर्ज की गईं. इसके अलावा मध्य प्रदेश और राजस्थान में 18-18, उत्तर प्रदेश में 12 और उत्तराखंड में 10 घटनाएं सामने आईं.

पराली जलाने पर कार्रवाई तेज

खेतों में आग लगाने की घटनाओं में बढ़ोतरी के बीच संबंधित एजेंसियों ने निगरानी और कार्रवाई भी तेज कर दी है. पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं. आने वाले दिनों में दिल्ली की हवा कैसी रहेगी, यह मौसम की स्थिति, हवा की रफ्तार, स्थानीय उत्सर्जन और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं पर निर्भर करेगा. फिलहाल, AQI के खराब श्रेणी में पहुंचने से राजधानी में प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ गई है.

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