Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत हो चुकी है और इन पावन दिनों में भक्त मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं. कई लोग अपनी सुविधा के अनुसार केवल पहला और आखिरी व्रत रखते हैं, लेकिन ऐसा करने के बावजूद पूरे नौ दिनों के नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए, तभी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है.
पहले दिन कलश स्थापना करना न भूलें
अगर आप केवल पहला और आखिरी व्रत रख रहे हैं, तब भी पहले दिन कलश स्थापना जरूर करें. इसके साथ ही मां दुर्गा की विधिवत पूजा करें और अखंड ज्योति जलाएं.
मान्यता है कि कलश स्थापना से घर में सुख-शांति बनी रहती है और पूजा में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती.
वहीं, आखिरी व्रत का पारण हमेशा कन्या पूजन और हवन के बाद ही करना चाहिए. कन्याओं को भोजन कराने और सम्मानपूर्वक विदा करने के बाद ही व्रत खोलना शुभ माना जाता है.
इन नियमों का जरूर रखें ध्यान
- पूरे 9 दिनों तक सात्विक भोजन करें, भले ही रोज व्रत न रखें
- प्याज और लहसुन का सेवन पूरी तरह से न करें
- घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें
- रोज गंगाजल से पूजा स्थल को शुद्ध करें
- सुबह-शाम माता की पूजा और आरती अवश्य करें
- ब्रह्मचर्य का पालन करें
- झूठ, क्रोध और अपशब्दों से दूर रहें
- बाल और दाढ़ी कटवाने से बचें
- दिन में सोने और तामसिक वस्तुओं से दूरी बनाए रखें
- अखंड ज्योति और कलश को अकेला न छोड़ें
इन गलतियों से करें बचाव
ध्यान रखें कि केवल पहला और आखिरी व्रत रखने का मतलब यह नहीं है कि बाकी दिनों में नियमों की अनदेखी की जाए.
नवरात्रि के दौरान मन को शुद्ध और सकारात्मक रखना बेहद जरूरी है. पूजा के समय किसी के प्रति गलत विचार, क्रोध या अपमान जैसी भावनाएं नहीं रखनी चाहिए.
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.

