भगवान को पाने का मार्ग है भक्ति: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, सतीखण्ड में भगवान शिव से यह सम्पूर्ण सृष्टि किस तरह हुई इसका बड़ा सुन्दर वर्णन किया गया है। इस संसार के अधिष्ठान देवता दो है। एक भगवान शंकर और दूसरे भगवान विष्णु, किसी कल्प में भगवान विष्णु से सृष्टि होती है और किसी कल्प में भगवान शिव सृष्टि होती है। श्रीशिवमहापुराण में रुद्र कल्प की कथा है और रुद्र कल्प में यह सम्पूर्ण सृष्टि भगवान शंकर से प्रगट हुई है।
सतीखण्ड में भगवान व्यास ने नवधाभक्ति का उपदेश दिया है। श्रीशिवमहापुराण के सतीखण्ड में नवधा भक्ति का वर्णन आता है। भक्ति का अर्थ होता है भगवान को पाने का मार्ग है। नवधा इसमें से किसी भक्ति का आश्रय लेने से भगवान की प्राप्ति होती है भगवान की कथा श्रवण करना, भगवान का कीर्तन करना, भगवान का स्मरण करना, भगवान की सेवा, पूजा,वंदन, हम भगवान के दास हैं यह अनुभव करना, हम भगवान के सखा हैं, इसका अनुभव करना, आत्म निवेदन यह नवधा भक्ति है। कल शिव विवाह की कथा होगी।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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