मां ब्रह्मचारिणी की तपस्या से मिलती है धैर्य और संकल्प की प्रेरणा: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, नवरात्रि की शुरुआत होती है माँ शैलपुत्री की पूजा से,दूसरे दिन आता है माँ दुर्गा का वह स्वरूप जो तप और अटूट संकल्प का प्रतीक माना जाता है।ये स्वरूप है मां ब्रह्मचारिणी का।माँ के तप और साधना में इतनी शक्ति थी कि उन्होंने अपने संकल्प को पूरा करने के लिए अत्यन्त कठिन तपस्या की।
माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यन्त शान्त, सरल और तेजस्वी माना जाता है। उनके दाहिने हाथ में जप की माला और बायें हाथ में कमण्डल सुशोभित होता है। इस स्वरूप में वाहन नहीं है।माँ तप कर रही हैं, यही स्वरूप है। माँ  ब्रह्मचारिणी ने शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या किया। उन्होंने लम्बे समय तक तप किया।अनेक प्रकार की कठिनाइयां आने पर भी तप नहीं छोड़ा।माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा में भक्त उनसे मानसिक शक्ति, धैर्य और आत्म संयम की प्रार्थना करते हैं।
नवरात्रि के दूसरे दिन भक्त माँ  ब्रह्मचारिणी की आराधना करते हैं। माँ के सनमुख दीप जलाया जाता है। पुष्प अर्पित किया जाता है और माँ का ध्यान किया जाता है। मां ब्रह्मचारिणी की कथा हम सबको एक महत्वपूर्ण संदेश देती है।जीवन में कोई भी लक्ष्य हो, उसे पाने के लिए केवल इच्छा ही पर्याप्त नहीं होती। धैर्य, अनुशासन और निरन्तर प्रयास भी आवश्यक है। जब मन विचलित हो, जब रास्ता कठिन लगे, किसी लक्ष्य तक पहुँचना मुश्किल लगे तो भक्त मां ब्रह्मचारिणी का स्मरण करते हैं।
श्रीमद्देवीभागवत में माँ ने स्वयं कहां है कि यदि मैं तुम में से निकल जाऊं तो तुम हिल भी नहीं सकते और यह भी कहा है कि- ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रहते हुए भी यदि शक्ति ही न रहे तो व्यक्ति कुछ कर ही नहीं सकता। कमजोर होने पर व्यक्ति यही कहता है कि- अब मुझमें चलने फिरने की शक्ति नहीं रही। इसीलिए शक्ति की आराधना करते रहिए, इससे आपका अनन्त ऊर्जा से सम्मिलन हो जायेगा।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।

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