ज्येष्ठ पूर्णिमा पर करें ये उपाय, खुलेंगे सुख-समृद्धि और सफलता के नए रास्ते

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Jyestha purnima 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास को धर्म, दान और पुण्य का अत्यंत पवित्र समय माना गया है, और इसकी पूर्णिमा का तो  महत्व और भी विशेष होता है. यह दिन शुभता, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है. वहीं ऐसी मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और पूजा-पाठ करने से जीवन में सुख-शांति और शुभ फलों की प्राप्ति होती है. साथ ही यह दिन भाग्य को मजबूत करने और आर्थिक प्रगति के लिए भी खास माना जाता है.
बता दें कि इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा दुर्लभ शुभ संयोग में पड़ रही है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है.ज्योतिषाचार्यो के अनुसार, इस दिन किए गए दीपक से जुड़े विशेष उपाय जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं.

कब मनाई जाएगी ज्येष्ठ पूर्णिमा

वैदिक पंचांग के मुताबिक, ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा ​तिथि 30 मई, शनिवार के दिन सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर शुरू होकर अगले दिन 31 मई 2026, रविवार को दोपहर 02 बजकर 14 मिनिट तक रहेगी. ऐसे में ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत 30 मई 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा. वहीं, स्नान-दान की पूर्णिमा 31 मई 2026, रविवार के दिन रहेगी. ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम के समय 07 बजकर 36 मिनिट तक रहेगा.

ज्येष्ठ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

ज्येष्ठ माह मे आने वाली पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है, जिसका विशेष धार्मिक महत्व है. इस पावन दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है. मान्यता है कि पवित्र नदी में स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पितृ दोष दूर होता है. ये धार्मिक क्रियाएं जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती हैं.

सुख, शांति और समृद्धि के लिए करें ये उपाय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रसोईघर घर की समृद्धि और स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है. ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन रसोई में दीपक जलाने से देवी अन्नपूर्णा और गुरु देव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे घर में सुख, समृद्धि और अन्न की बरकत बनी रहती है.
मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा की रात घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि इसी द्वार से मां लक्ष्मी का आगमन होता है. यह उपाय सुख-समृद्धि बढ़ाने, आर्थिक परेशानियां दूर करने और गुरु कृपा पाने में सहायक माना जाता है.
इसके अलावा, पूर्णिमा की सुबह स्नान के बाद तुलसी में जल अर्पित करें और घी का दीपक जलाकर आरती करें. इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और धन-संपत्ति की वृद्धि होती है.
ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में दीपदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इससे मानसिक अशांति दूर होती है, पितृ दोष समाप्त होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है. यह कर्म जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि लाता है.
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