जिसका ज्ञान क्रियात्मक है, वही दे सकता है उपदेश: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, उपदेश देते समय उपदेशक को इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि मैं जो बोलता हूँ, वह क्या मेरे जीवन में पूरी तरह से उतर चुका है ? हमेशा ‘ पूरणपूड़ी ‘ खाने की लत वाले अपने बालक को सुधारने के लिए उसकी माँ ने जब एकनाथ जी से विनती की, तब उन्होंने स्वयं विचार किया, ‘ मैं यदि रोज मिष्ठान खाता हूँ तो भला मेरे उपदेश का असर बालक पर क्या पड़ेगा?
अतः उन्होंने उस माँ को तीन दिन बाद आने को कहा। स्वयं ने जीवन भर मिष्ठान न खाने का व्रत लिया। और जब तीन दिनों में संकल्प दृढ़ हो गया, तभी उन्होंने बालक को उपदेश दिया। बालक उसमें सुधर गया। यह देखकर माँ  की आंखों में कृतज्ञता के आंसू आ गए। उसने पूँछा,  ‘ इतनी छोटी-सी बात को आपने पहले ही दिन क्यों न कह दिया ? सन्त ने कहा , माँ ! उस दिन तो मैं भी मिष्ठान के मोह में लिपटा हुआ था, अतः मेरा उपदेश व्यर्थ ही जाता।
प्रभु की कृपा से मिष्ठान छोड़ने का व्रत ले सका हूँ, इसलिए तुम्हारे पुत्र ने मेरी बात स्वीकार की है।’ माँ की आँखों में आँसू बहते रहे। जिसका ज्ञान क्रियात्मक है, वही उपदेश दे सकता है।सृष्टि को नहीं, सृष्टि को देखने वाली दृष्टि को बदलो। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
Latest News

‘होर्मुज स्ट्रेट तो खुलकर रहेगा और यह जल्द होगा!’, शांति वार्ता से पहले ट्रंप ने दी ईरान को कड़ी चेतावनी

US Israel Iran War: पाकिस्तान में होने जा रही महत्वपूर्ण शांति वार्ता से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप...

More Articles Like This

Exit mobile version