जिसका जीवन दिव्य होता है, वही मृत्यु के पश्चात बनता है देवता: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, आप अपनी सभी इंद्रियों को प्रेम से समझाकर विषय के मार्ग से रोको और प्रभु के मार्ग में लगाओ। आँखों से कहो कि जगत के रूप के पीछे मत भटको, क्योंकि शिव के रूप दर्शन में ही कल्याण समाया हुआ है।
कानों से कहो कि निंदा के वचनों को सुनकर संसार का जहर मत चूसो, क्योंकि शिव के डमरू निनाद एवं कीर्तन-श्रवण में ही जीवन का श्रेय समाया हुआ है। जीभ से कहो कि किसी की निंदा या स्वाद-लालसा के पीछे मत भटक, क्योंकि शिव के गुणगान और प्रसाद-ग्रहण से ही कल्याण हो सकेगा।
इस तरह अपनी त्वचा और नाक की इंद्रियों को भी प्रेम से समझाकर प्रभु के मार्ग पर लगाओ। मनुष्य होशियार तो है, किन्तु ठोकर खाये बिना उसमें सावधानी आती नहीं है। जो दूसरों की सेवा करता है, उस पर परमात्मा की स्नेह-दृष्टि होती है। वासना ही पुनर्जन्म का कारण है। जिसका जीवन दिव्य होता है, वही मृत्यु के पश्चात देवता बनता है।
जो जिह्वा द्वारा अधिक पाप करता है, वह अगले जन्म में गूँगा होता है। प्रभु और परोपकार के लिए जो रोता है, उसके जीवन में कभी रोने का मौका नहीं आता। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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