मन अति शुद्ध हो तभी प्रभु-मिलन की जागृत होती है उत्कंठा: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्रीरामचरितमानस आपको भक्त बनने का उपदेश देता है। मानस का उपदेश है – भक्त बनने के लिए आपको कपड़े बदलने या घर छोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है। जीवन में यदि भक्त के गुण उतरें तो मनुष्य अपने आप भक्त बन जाता है।
नरसी मेहता, मीरा जी, तुकाराम आदि घर में ही रहते थे। साधु वेश भी नहीं पहनते थे, किन्तु कौन कह सकता है कि ये भक्त नहीं थे। संतों का कहना है कि प्रभु के द्वारा दिए गए घर में विवेक पूर्वक रहोगे तो बिना कपड़ों के बदले ही भक्त बन सकोगे। हृदय शुद्ध बनाओगे तो ही भक्त हो सकोगे। केवल कपड़े बदलने से तो कभी भी भक्त नहीं हो सकोगे।
मन, वचन और कर्म से जो पाप नहीं करता, वही भक्त है। कोई व्यावहारिक काम करते समय भी जो मन को बचाकर रखना है, वही भक्त है। जिसको दूसरे में गुण ही दिखाई देते हैं, वही भक्त है। ऐसे गुण यदि आपके जीवन में उतरेंगे तो आप भक्त हैं और सर्वेश्वर आपसे मिलने के लिए सामने आएंगे।
मन अति शुद्ध हो तभी प्रभु-मिलन की उत्कंठा जागृत होती है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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