‘प्रभाते कर दर्शनम्’ छोड़कर ‘कप दर्शनम्’ की ओर बढ़ रही है हमारी संस्कृति: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, अपने देश की संस्कृति तो ‘ प्रभाते कर दर्शनम् ‘ की है, परन्तु आज तो ज्यादातर लोग ‘ प्रभाते कप दर्शनम् ‘ की कामना वाले बन गये हैं। हमें प्रकाश और प्राणदान करने वाले सूर्यनारायण की पृथ्वी प्रदक्षिणा तो बहुत सवेरे से ही प्रारम्भ हो जाती है, फिर भी बहुत लोग सोते ही रहते हैं और जब तक ” चाय हो गई है, उठिए” नहीं सुन लेते हैं, तब तक आँख नहीं खोलते।
इस ‘ कपदर्शनम् ‘ की मनोवृति के कारण ही आज हम पतन की खाईं में गिरते चले जा रहे हैं। क्या हम चाय के गुलाम बनने के लिए पैदा हुए हैं? नहीं कदापि नहीं। हम तो प्रभु के द्वारा दिए गये दो हाथों से प्रभु को पसन्द आने वाले सत्कर्म करके प्रभु के प्रिय बनने के लिये पैदा हुए हैं।
जितना धन आपके हाथों से सत्कर्म में लगने वाला है, उतना ही धन आपका है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
Latest News

22 September 2026 Ka Panchang: मंगलवार का पंचांग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

22 सितंबर 2026 मंगलवार को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. जानिए आज का पंचांग, एकादशी तिथि, श्रवण नक्षत्र, ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त, शहरों के अनुसार राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय.

More Articles Like This

Exit mobile version