श्रद्धा से किया गया श्राद्ध देता है पूर्ण फल: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्राद्ध में श्रद्धा और विश्वास के साथ पितरों के लिये जो कार्य किया जाय,वो मंगल कारक होता है।श्राद्ध में तीन सावधानी बहुत आवश्यक है। ये श्राद्धकर्म के लिये बहुत महत्वपूर्ण बात है, जिसे ध्यान देना चाहिए। ” त्रीणि यत्र प्रशंसन्ति।” श्राद्ध में तीन चीजों की बड़ी प्रशंसा की गयी है।
कौन सी तीन चीजें?÷ “शौचं अक्रोधं अत्वरां।” पहली सावधानी-शौचं÷ श्राद्ध करें तो बड़े पवित्रता से करें, हर वस्तु पवित्र हो, ये प्रयास करें। दूसरी बात- अक्रोधं ÷ श्राद्ध को करते समय क्रोध को न आने दें।श्राद्ध में क्रोध नहीं करना चाहिए। श्राद्ध करते समय क्रोध आ जाय, तब वो श्राद्ध अपवित्र हो जाता है।श्राद्ध में तीसरी सावधानी-अत्वरां ÷ जल्दबाजी नहीं करना चाहिए। जैसे अन्य कर्मों में व्यक्ति जल्दी करता है।
जल्दी-जल्दी मंत्र पढ़ लेता है, अन्य कर्म जल्दी-जल्दी कर लेता है।श्राद्ध में शीघ्रता नहीं करना चाहिए। बल्कि आराम से धीरे-धीरे, एक-एक कार्य का सम्पादन करना चाहिए। वो उत्तम श्राद्ध कहा जाता है। श्राद्धकर्म के द्वारा सम्पूर्ण विश्व का प्रीणन होता है। जो हम सबकी संस्कृति है, जो भारतीय संस्कृति है। ” सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित दुःख भाग भवेत।।” सनातन धर्म की समस्त क्रियाओं का फल यही माना जाता है। श्राद्ध कर्म भी यही फल है।
श्राद्ध के द्वारा सम्पूर्ण विश्व का पोषण होता है। श्राद्धं श्रद्धान्वितं कुर्यात् ÷ श्रद्धा से युक्त होकर अगर व्यक्ति श्राद्ध करे तो, प्रीणयन्तिखिलं जगत ÷ तो सम्पूर्ण जगत उससे सन्तुष्टि को प्राप्त करता है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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