Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, ममता राखे राम से, समता सब संसार, संसार में सम्मान सबका करना चाहिए, महत्व सबको देना चाहिए लेकिन ममता किसी से नहीं रखना चाहिए। तीन शब्द अपने शास्त्रों में बताया गया। प्रेम, आसक्ति और ममता। प्रेम का प्रारम्भ भले ही दुखद हो लेकिन परिणाम सुखद होता है। आसक्ति का प्रारम्भ भले ही सुखद हो लेकिन परिणाम दुखद होता है। लेकिन ममता व्यक्ति को हमेशा रुलाती है।