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The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, दीपावली भारत का सबसे प्रसिद्ध प्रकाश पर्व है। भगवान श्री राम ने सज्जनों की रक्षा दुष्टों की दुष्टता को समाप्त करने के लिए तथा धर्म की स्थापना के लिए अपने पिता महाराज दशरथ एवं महारानी कैकेई के कहने से चौदह वर्ष के लिए वन पधारे। अपनी वनयात्रा में भगवान वन में संतों से मिले, श्री लक्ष्मण जी को माध्यम बनाकर श्री राम गीता, शबरी मां को माध्यम बनाकर
नवधाभक्ति, श्री विभीषण जी को माध्यम बनाकर धर्मरथ का उपदेश दिए। भगवान श्री राम के द्वारा रावण आदि राक्षसों का उद्धार हुआ। आसुरी वृत्ति, अधर्म की सत्ता को समाप्त कर, श्री सुग्रीव जी महाराज श्री विभीषण जी महाराज को राजा बनाकर धर्म की सत्ता की स्थापना किये। भगवान चौदह वर्ष बाद अयोध्या पधारे। कार्तिक अमावस्या तिथि पर दीप जलाकर सबने उत्सव मनाया। भगवान श्री राम के अयोध्या आगमन की खुशी का उत्सव दीपावली के रूप में पूरी धरती और अनन्त ब्रह्माण्ड में मनाया जाता है और मानना चाहिए।
दूसरी कथा भागवत की है- समुद्र मंथन कार्तिक मास में हुआ। ” श्रीमणि रम्भा वरूणी, अमिअ शंख गजराज।
कार्तिकमास अमावस्या तिथि को समुद्र से माता लक्ष्मी प्रगट हुईं। भक्तों ने माता लक्ष्मी के प्राकट्य का उत्सव दीपावली के रूप में मनाया। आज के दिन श्री लक्ष्मी गणेश की पूजा की जाती है। कई लोग प्रश्न करते हैं माता लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा का क्या मतलब है। अपने यहां कोई पूजा हो प्रथम श्री गणेश जी की पूजा अवश्य होती है। पौराणिक कथा के अनुसार गणेश जी प्रथम पूज्य हैं।
किसी भी देव की पूजा करना है तो पहले गणपति पूजा होगी। आध्यात्मिक दृष्टि से श्री गणेश जी विवेक के स्वरूप हैं जीवन में सब कुछ हो विवेक न हो तो सब बेकार है । मां लक्ष्मी की कृपा से धन हो और विवेक न हो तो हम यश,पुण्य शुभलोक की प्राप्ति नहीं कर सकते। गणपति पूजा विवेक का सम्मान है।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।