दूसरे के पाप का विचार हमारे मन को बनता है पापी: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, कई लोगों को भक्तों में दोष दिखाई देते हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोग तो भगवान में भी बुराइयाँ ढूँढने की नजर रखते हैं।मनुष्य के मन में यदि एक बार दोष देखने की आदत पड़ जाय तो फिर हमेशा वह दोष ही देखता रहता है।
आप भी यदि दूसरों की कमजोरियों को ही देखने की आदत डालोगे तो हर एक मनुष्य में आपको कुछ  न  कुछ दोष तो दिखाई देगा ही। इसका कारण यह है कि प्रत्येक मनुष्य में कुछ न कुछ बुराई तो होती ही है। मनुष्य में यदि बुराई न हो तो वह इस मनुष्य शरीर में रह ही नहीं सकता।
मन में यदि मैल न हो तो वह भी समाप्त हो जाय। इसीलिए सतंजन कहते हैं दूसरे के दोष देखने की आदत छोड़ो। दृष्टि को हमेशा गुणग्राही बनाओ। अन्य के दोष देखने की आदत हमारी आँख, मन और वाणी को दूषित करती है।दूसरे के पाप का विचार हमारे मन को पापी बनता है।
धन का दुरुपयोग लक्ष्मी का अपमान है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
Latest News

सावन में केवल सोमवार व्रत ही नहीं, ये 6 व्रत भी होते हैं अति-दुर्लभ, जानें इनका धार्मिक महत्व

Sawan Ke Mahatvapurna Vrat: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की उपासना का सर्वोत्तम समय माना जाता है. इस...

More Articles Like This

Exit mobile version