भगवान श्री गणेश जी की उपासना से सारे विघ्नों का होता हैं हरण: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवान गणपति ही शेषनाग बनकर पृथ्वी को उठाये हुए हैं। हर जगह, हर समय श्री गणेश जी विद्यमान रहते हैं। इसलिए बड़ा सुंदर श्लोक आता है-
नमो विष्णुस्वरूपाय नमो रुद्रस्वरुपिणे।
नमस्ते ब्रह्मस्वरुपाय नमस्तेऽन्तशक्तये।
आप विष्णु स्वरूप हो प्रभु, और आप ही शंकर रूप हैं। आप ही ब्रह्मा हैं, अनंत में आप ही विद्यमान हो। ब्रह्मा विष्णु आपके ही विग्रह हैं। सनातन धर्म में अन्तिम प्रमाण वेद है। वेद में श्रीगणेश भगवान के मंत्र स्पष्ट रूप से आते हैं।
गणानांत्वा गणपति गुं हवा महे।
प्रियाणांत्वा प्रियपति गुं हवा महे।
निधीनांत्वा निधिपति गुं हवा महे। 
अथर्वशीर्ष जो अथर्ववेद का अंश है। उसमें स्पष्ट लिखा है-
नमस्ते गणपतये
त्वमेव  प्रत्यक्षं तत्वमसि, त्वमेव केवलं कर्तासि,
त्वमेव केवलं भर्तासि,
त्वमेव केवलं हर्तासि।
आपको नमस्कार है क्योंकि आप ब्रह्म स्वरूप हैं। ‘तत्वमसि’जो वेद का महावाक्य है,वह तत्व भगवान् श्रीगणेशजी आप हैं।
भगवान श्री गणेश जी की उपासना से सारे विघ्नों का हरण होता रहता है। जो व्यक्ति गणेश भगवान की उपासना करते रहते हैं उनके जीवन में जल्दी-जल्दी विघ्न नहीं आते। श्री गणेश पुराण में कथा आती है एक विघ्नासुर नाम का दैत्य हुआ।
उसने देवता, दानव, मानव सबको दुःखी कर दिया। अनेक संघर्ष हुए लेकिन उससे सब हार गये। सभी ने भगवान श्री गणेश जी की शरण ली। विघ्नासुर का श्री गणेश जी के साथ युद्ध हुआ।वह पराजित होकर गणेश भगवान के चरणाश्रित हुआ। तो भगवान उसको अपने पास रख लिये। उसने कहा मेरा काम है विघ्न डालने का, मेरा नाम ही विघ्नासुर है, तो देवताओं ने कहा जो गणेश पूजा किये बिना कार्य का आरम्भ करें, तो उसमें तुम विघ्न उपस्थित करते रहना। तुम्हारा अपना काम भी पूरा होता रहेगा और जो गणेश भगवान का स्मरण करके कार्य आरम्भ करें उनके कार्य में कभी विघ्न नहीं डालना। स्मरण करने मात्र से भगवान श्रीगणेशजी प्रसन्न हो जाते हैं।
जो लोग सदा भगवान श्री गणेश जी का स्मरण करते रहते हैं, उनके जीवन के हर कार्य निर्विघ्न सम्पन्न होते हैं। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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