संत सेवा से ही सिद्ध होते हैं योग, जप और तप: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, स्कन्द महापुराण में भगवान शंकर से भगवती पार्वती ने पूछा- सबसे अधिक आराधना योग्य कौन है? भगवान शंकर कहते हैं इस संसार में सबसे अधिक पूजनीय भगवान नारायण है। भगवती पार्वती ने कहा आपने आखिरी बात कह दिया कि अभी कुछ कहना शेष है- भगवान शंकर कहते हैं नारायण से भी ज्यादा बंदनीय, नारायण के प्यारे संतजन है।
सनातन धर्म में अकेले भगवान की पूजा नहीं, भगवान के साथ भक्त की पूजा भी आवश्यक है। इसीलिए जब हम भगवान राम की पूजा करते हैं तो साथ में हनुमान जी की पूजा भी करते हैं। मानत सुख सेवक सेवकाई। सेवक बैर बैर अधिकाई।। भगवान संतों की सेवा को अपनी सेवा मान लेते हैं।
संत सेवा से भगवान इतने प्रसन्न होते हैं जितना और किसी साधन से प्रसन्न नहीं होते। हाथी के पांव में सभी पांव समा जाते हैं। हाथी का पांव इतना बड़ा है कि एक हाथी के पांव में दूसरे सभी जीवों के पांव समा जाते हैं। ऐसे ही संत भंडारा,यथाशक्ति संतसेवा से शास्त्रों में वर्णन है सभी साधन सिद्ध हो जाते हैं। योग, जप, तप, भजन सबका फल संत सेवा से प्राप्त हो जाता है।
श्रीभक्तमालजी में जिन भक्तों की कथा है, जिन्हें भगवान प्राप्त हुए, उन सबके यहां संतसेवा होती थी। मीराबाई, कर्माबाई, करमैती बाई, धन्ना जी भगत किसी की कथा पढ़ते हैं तो उनके यहां संत पधारते थे। संतों का भंडारा होता था। संत भंडारा की बहुत महिमा है। यही संत भंडारा अगर घर की अपेक्षा तीर्थ में हो तो उसका अनन्त गुना फल प्राप्त होता है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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