Auto Industry Alert: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर भी पड़ता नजर आ रहा है. हालांकि अभी तक उत्पादन पर सीधा असर नहीं पड़ा है, लेकिन इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले 4 से 6 हफ्तों में सप्लाई चेन पर दबाव साफ दिख सकता है.
गैस सप्लाई सबसे बड़ी चिंता
ऑटो सेक्टर के अधिकारियों के अनुसार, सबसे बड़ा खतरा गैस सप्लाई को लेकर है. कई मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं में कमर्शियल एलपीजी और इंडस्ट्रियल गैस का अहम इस्तेमाल होता है, खासकर पेंट शॉप, कास्टिंग और फोर्जिंग यूनिट्स में. गैस की कमी होने पर उत्पादन लागत बढ़ सकती है और सप्लाई प्रभावित हो सकती है.
मिडिल ईस्ट तनाव से सप्लाई पर असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई सप्लायर्स ने पहले ही डिलीवरी में देरी की जानकारी दी है. खास तौर पर कतर से गैस सप्लाई लगभग ठप हो गई है, क्योंकि ईरान के हमलों के चलते वहां उत्पादन प्रभावित हुआ है. इसका असर धीरे-धीरे इंडस्ट्री पर पड़ सकता है.
फिलहाल स्टॉक से राहत
अभी कंपनियों के पास 4 से 6 हफ्तों का कंपोनेंट स्टॉक मौजूद है, जिससे तत्काल कोई बड़ी समस्या नहीं है. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह संकट लंबा चला, तो उत्पादन पर असर पड़ना तय है, खासकर उन यूनिट्स में जहां ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है.
बड़ी कंपनियों का क्या कहना है
महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और किआ इंडिया जैसी कंपनियों ने फिलहाल उत्पादन पर किसी असर से इनकार किया है. कंपनियों का कहना है कि सप्लाई चेन अभी स्थिर है, लेकिन हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है.
गैस पर निर्भरता अलग-अलग
इंडस्ट्री रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग कंपनियों की गैस पर निर्भरता भी अलग है. मारुति सुजुकी में करीब 74 प्रतिशत, महिंद्रा एंड महिंद्रा में 38 प्रतिशत, टाटा मोटर्स में 33 प्रतिशत और हुंडई में 31 प्रतिशत गैस पर निर्भरता है. ऐसे में संकट का असर कंपनियों पर अलग-अलग पड़ सकता है.
आगे क्या हो सकता है असर
अगर गैस की कमी और समुद्री परिवहन में बाधाएं बढ़ती हैं, तो उत्पादन और सप्लाई दोनों प्रभावित हो सकते हैं. इंडस्ट्री के अधिकारी मानते हैं कि आने वाले कुछ हफ्ते बेहद अहम होंगे.
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