CBG Excise Duty Exemption:सीएनजी में मिलाए जाने वाले बायोगैस पर प्रस्तावित एक्साइज ड्यूटी में छूट से भारत में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये तक के निवेश की संभावना जताई गई है. यह जानकारी इंडियन बायोगैस एसोसिएशन (आईबीए) ने रविवार को दी. उद्योग संगठन के अनुसार केंद्रीय बजट 2026 में घोषित यह फैसला स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत के 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
CBG मिश्रण से बढ़ेगी गैस की मांग
आईबीए के अनुसार, सीएनजी के साथ मिश्रित कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) पर एक्साइज ड्यूटी छूट से परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता बेहतर होगी और बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित होगा. एसोसिएशन ने कहा कि यदि अगले पांच वर्षों में देश भर में सिटी गैस वितरण नेटवर्क बायोगैस का सिर्फ 5 प्रतिशत मिश्रण भी हासिल कर लेते हैं, तो इसके लिए सालाना करीब 2.5 से 3 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटीपीए) सीबीजी की जरूरत होगी.
नीति स्थिर रही तो निवेश होगा दोगुना
केवल इसी पहल से लगभग 45,000 करोड़ से 55,000 करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित हो सकता है. आईबीए के अनुसार यदि सरकार स्पष्ट, स्थिर नीति ढांचा और अनुमानित मूल्य निर्धारण प्रणाली लागू करती है, तो 2032 तक बायोगैस मिश्रण का स्तर 7–8% तक पहुँच सकता है. ऐसी स्थिति में कुल निवेश क्षमता बढ़कर करीब 1 लाख करोड़ रुपये तक हो सकती है. एसोसिएशन ने यह भी कहा कि यह एक्साइज छूट लंबे समय से चली आ रही असमानता को खत्म करती है, क्योंकि नवीकरणीय और पर्यावरण-अनुकूल ईंधन होने के बावजूद सीबीजी पर पहले सीएनजी के समान कर लगाया जाता था.
उपभोक्ताओं और कंपनियों दोनों को लाभ
मिश्रित ईंधन में बायोगैस हिस्से पर एक्साइज हटाने से यह अधिक किफायती हो जाएगा. सिटी गैस वितरण कंपनियों के लिए इसका मतलब होगा कि औसत ईंधन लागत कम होगी. उपभोक्ताओं को स्थिर या कम गैस कीमतों का लाभ मिल सकता है, जबकि उत्पादकों को सुनिश्चित बिक्री और स्थिर आय का स्रोत मिलेगा. आईबीए के अनुसार, यह नीति बदलाव निजी निवेश को तेज कर सकता है, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और ग्रामीण विकास को भी बढ़ावा देगा.
कचरे से ऊर्जा उत्पादन की बड़ी क्षमता
भारत में धान की पराली, प्रेस मड, नगर निगम के ठोस कचरे और गोबर जैसे जैविक अपशिष्ट से हर वर्ष लगभग 60 मिलियन टन सीबीजी उत्पादन की क्षमता मौजूद है. प्रस्तावित एक्साइज छूट से 4.8 से 10 टन प्रतिदिन क्षमता वाले सामान्य संयंत्रों की आंतरिक प्रतिफल दर में सुधार होने की उम्मीद है, जो कच्चे माल और परिवहन लागत पर निर्भर करेगी. इससे पहले जो परियोजनाएं आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं थीं, उन्हें अब वित्तीय सहायता और निवेश मिलना आसान हो सकता है.
कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी संभव
सीबीजी अपने पूरे जीवनचक्र में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 70 से 90 प्रतिशत तक घटाने में सक्षम है, विशेष रूप से जब इसे कृषि अपशिष्ट से तैयार किया जाए. आईबीए के अनुसार यदि बायोगैस मिश्रण का स्तर 10 प्रतिशत तक पहुँचता है, तो हर वर्ष 12 से 15 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) समतुल्य उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है, जो भारत के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी.
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