Sensex opening bell: लाल निशान में खुला भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में भी गिरावट

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Sensex opening bell: हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन यानी गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला. इस दौरान, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,346.17 से 410.34 अंक गिरकर 73,935.83 पर खुला. वहीं एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,405.60 से 123.15 अंक गिरकर 23,282.45 पर खुला.

शुरूआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स 227.52 अंकों यानी 0.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,118.65 पर था, जबकि निफ्टी50 80.05 अंक यानी 0.34 प्रतिशत गिरकर 23,325.55 पर ट्रेड कर रहा था. निफ्टी 50 पैक में ट्रेंट, टीएमपीवी, इंफोसिस, आयशर मोटर और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि इसके विपरीत इटरनल, टाइटन, एशियन पेंट्स और अदाणी इंटरप्राइजेज के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई.

इन शेयरो में आई गिरावट 

व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.17 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.09 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई. वहीं, सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी, निफ्टी आईटी, निफ्टी मेटल और निफ्टी प्राइवेट बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी केमिकल और निफ्टी एफएमसीजी बेहतर प्रदर्शन करते नजर आए.

बाजार में मजबूत और टिकाऊ तेजी की कम संभावना

घरेलू मोर्चे पर, निवेशक शुक्रवार को जारी होने वाले भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के परिणाम की प्रतीक्षा करते हुए सतर्कता बरत सकते हैं. मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार और बड़े पैमाने पर बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है. जब तक पश्चिम एशिया संकट का कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक बाजार में मजबूत और टिकाऊ तेजी की संभावना कम दिखाई देती है.

वहीं अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों के शेयर बाजारों में जारी तेजी यह संकेत देती है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से और अधिक पैसा निकाल सकते हैं। एक्सपर्ट ने आगे कहा कि विदेशी निवेशकों द्वारा डेरिवेटिव बाजार में बड़ी मात्रा में शॉर्ट पोजिशन बनाना भी बाजार में आगे और कमजोरी आने की आशंका को बढ़ाता है। हालांकि यदि पश्चिम एशिया संकट का कोई अप्रत्याशित समाधान निकलता है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो स्थिति बदल सकती है.

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