Crude Oil Price Fall: पश्चिम एशिया में युद्धविराम की बढ़ती उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई. बाजार खुलते ही ब्रेंट क्रूड वायदा करीब 7% गिरकर 97.18 डॉलर प्रति बैरल के इंट्राडे निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड में 6% से ज्यादा की गिरावट आई और यह 86.72 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया. इस गिरावट को वैश्विक तनाव में संभावित कमी से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे सप्लाई को लेकर बनी चिंताएं कम हुई हैं.
पिछले हफ्ते से जारी है गिरावट का रुझान
विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से कमोडिटी बाजार में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. हाल ही में 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचा ब्रेंट क्रूड अब 10% से ज्यादा गिरकर करीब 91 डॉलर के स्तर पर आ गया है. इससे वैश्विक तेल बाजार में दबाव कम हुआ है.
भारत के लिए राहत की खबर
तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए राहत लेकर आ सकती है. इससे देश के तेल आयात बिल, चालू खाता घाटा (CAD) और रुपए पर पड़ने वाला दबाव कम हो सकता है. साथ ही महंगाई पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि तेल की कीमतें कई वस्तुओं और सेवाओं की लागत को प्रभावित करती हैं.
महंगाई और CAD पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल का बदलाव भारत के चालू खाता घाटे को जीडीपी के मुकाबले 0.3 से 0.5 प्रतिशत तक प्रभावित कर सकता है. वहीं, महंगाई दर (CPI) पर इसका असर 20 से 30 बेसिस पॉइंट तक देखा जा सकता है.
तकनीकी स्तरों पर बाजार की नजर
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी कच्चा तेल फिलहाल 85 से 87 डॉलर के अहम स्तर के आसपास बना हुआ है. यदि कीमतें 92 से 94 डॉलर के ऊपर जाती हैं तो बाजार में फिर से तेजी आ सकती है और दाम 98 से 100 डॉलर तक पहुंच सकते हैं. वहीं, अगर कीमतें 85 डॉलर से नीचे फिसलती हैं तो यह 81 से 82 डॉलर तक गिर सकती हैं.
उतार-चढ़ाव का खतरा अभी बरकरार
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट के बावजूद बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है. भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण तेल की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है.
रुपए और बाजार पर असर
तेल की कीमतों में गिरावट से रुपए को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. यदि तेल की कीमतें दोबारा बढ़ती हैं या विदेशी निवेश में कमी आती है तो रुपए पर फिर से दबाव बढ़ सकता है.
अमेरिका और एशिया के बाजारों का हाल
इस बीच अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई. S&P 500 और नैस्डैक क्रमशः 0.84 प्रतिशत और 0.37 प्रतिशत गिरकर बंद हुए. इसके विपरीत एशियाई बाजारों में मजबूती देखने को मिली. जापान का निक्केई 225 3.26 प्रतिशत उछला, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.36 प्रतिशत बढ़ा और हांगकांग का हैंग सेंग 1.30 प्रतिशत चढ़ा.
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