Currency Update, 16 July: वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है. गुरुवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और कमजोर होकर 96.2475 पर खुला. यह अपने हालिया निचले स्तर 96.96 के बेहद करीब पहुंच गया है.
जुलाई में अब तक रुपया करीब 1.7% टूट चुका है, जिससे आयात, ईंधन और रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है.
क्यों लगातार कमजोर हो रहा है रुपया?
रुपये की कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है. भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है.
ऐसे में तेल महंगा होने पर कंपनियों को ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव बनता है. इसके अलावा, बाजार में यह आशंका भी बढ़ गई है कि यदि Strait of Hormuz में तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है.
अमेरिका-ईरान तनाव ने क्यों बढ़ाई चिंता?
हाल के घटनाक्रमों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. अमेरिका द्वारा ईरान के तटीय रक्षा और मिसाइल ठिकानों पर कार्रवाई के बाद ईरान ने ऊर्जा निर्यात में और कटौती की चेतावनी दी है. इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाकर अमेरिकी डॉलर जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख किया. इसका सीधा असर भारतीय रुपये समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर देखने को मिला.
RBI की कोशिशें क्यों पड़ रही हैं कमजोर?
कुछ सप्ताह पहले जब कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई थी, तब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए थे. इससे उम्मीद थी कि रुपये को मजबूती मिलेगी. लेकिन अब कच्चे तेल में फिर आई तेजी और डॉलर की बढ़ती मांग ने उन प्रयासों का असर काफी हद तक कम कर दिया है. बाजार में डॉलर की लगातार बढ़ती मांग के कारण रुपया दबाव में बना हुआ है.
कमजोर रुपये का आपकी जेब पर क्या होगा असर?
अगर रुपया इसी तरह कमजोर होता रहा तो इसका असर आम लोगों की जेब पर भी साफ दिखाई दे सकता है.
- पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं.
- हवाई यात्रा महंगी हो सकती है क्योंकि एविएशन फ्यूल की लागत बढ़ेगी.
- मोबाइल, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित सामान महंगे हो सकते हैं.
- विदेश में पढ़ाई और यात्रा का खर्च बढ़ सकता है.
- कई आयातित खाद्य उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी संभव है.
- महंगाई बढ़ने पर RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है, जिससे लोन और EMI पर असर पड़ सकता है.
आगे कैसी रह सकती है रुपये की चाल?
फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले अगले घटनाक्रम पर टिकी हुई है. यदि तनाव और बढ़ता है तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो भारतीय रुपये पर दबाव जारी रह सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रुपया 96.96 के स्तर से भी नीचे फिसलता है, तो यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे कमजोर स्तरों में शामिल हो सकता है. ऐसे में आने वाले दिनों में विदेशी मुद्रा बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखना बेहद महत्वपूर्ण होगा.
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