EPFO New Rule: देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने प्रोविडेंट फंड (PF) से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है. इस नए प्रावधान का सीधा असर कर्मचारियों की मासिक सैलरी और रिटायरमेंट सेविंग्स पर पड़ सकता है. खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनकी बेसिक सैलरी निर्धारित वेतन सीमा से काफी अधिक है. नए नियम के तहत अब 15,000 रुपये की वैधानिक वेतन सीमा से ऊपर होने वाले PF योगदान को पूरी तरह स्वैच्छिक (Voluntary) बना दिया गया है. यानी कर्मचारी अब अपनी जरूरत और वित्तीय योजना के हिसाब से यह तय कर सकेंगे कि उन्हें अतिरिक्त PF कटवाना है या अपनी टेक-होम सैलरी बढ़ानी है.
EPFO ने क्या बदला है नया नियम?
EPFO की ओर से अधिसूचित Employees’ Provident Funds Scheme, 2026 के तहत स्पष्ट किया गया है कि वैधानिक वेतन सीमा तक PF योगदान पहले की तरह अनिवार्य रहेगा, लेकिन इसके ऊपर का योगदान अब कर्मचारी की इच्छा पर निर्भर करेगा. नियमों के मुताबिक, कोई भी कर्मचारी कानूनी वेतन सीमा से अधिक वेतन मिलने की स्थिति में चाहे तो उसी सीमा से ऊपर भी PF में योगदान जारी रख सकता है, लेकिन यह पूरी तरह स्वैच्छिक होगा. इसका मतलब है कि अब अतिरिक्त PF कटौती केवल कर्मचारी की सहमति से ही होगी.
15,000 रुपये तक का योगदान रहेगा अनिवार्य
नए नियम में यह भी साफ किया गया है कि वर्तमान में निर्धारित 15,000 रुपये प्रति माह की वैधानिक वेतन सीमा पर 12 प्रतिशत PF योगदान पहले की तरह अनिवार्य रहेगा. यानी यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये या उससे अधिक है, तो हर महीने 1,800 रुपये कर्मचारी के हिस्से से PF में जमा किए जाएंगे. इसी राशि के बराबर योगदान नियोक्ता भी करेगा. इस हिस्से में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है.
किन कर्मचारियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
यह बदलाव सभी कर्मचारियों के लिए नहीं है. इसका सबसे अधिक असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से काफी ज्यादा है. अब तक कई संस्थानों में कर्मचारियों की पूरी बेसिक सैलरी पर 12 प्रतिशत की दर से PF कटौती की जाती थी. नए नियम के बाद ऐसी अतिरिक्त कटौती अनिवार्य नहीं रहेगी. यानी कर्मचारी चाहें तो अधिक PF जमा कर सकते हैं और चाहें तो केवल वैधानिक सीमा तक ही योगदान कर सकते हैं.
उदाहरण से समझिए नया नियम
मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50,000 रुपये प्रति माह है. पहले यदि कंपनी पूरी बेसिक सैलरी पर PF काटती थी, तो लगभग 6,000 रुपये कर्मचारी के हिस्से से PF में जमा होते थे और उतनी ही राशि नियोक्ता भी जमा करता था. अब नए नियम के अनुसार अनिवार्य योगदान केवल 15,000 रुपये की वैधानिक सीमा तक ही रहेगा. यानी कर्मचारी के हिस्से से केवल 1,800 रुपये और नियोक्ता की ओर से भी 1,800 रुपये का योगदान अनिवार्य होगा. यदि कर्मचारी इससे अधिक राशि PF में जमा कराना चाहता है, तो उसे इसके लिए स्वैच्छिक विकल्प चुनना होगा. अन्यथा अतिरिक्त कटौती नहीं की जाएगी.
टेक-होम सैलरी पर क्या पड़ेगा असर?
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी पर देखने को मिल सकता है. यदि कोई कर्मचारी 15,000 रुपये से ऊपर की सैलरी पर अतिरिक्त PF योगदान नहीं करवाता है, तो वह रकम उसकी मासिक सैलरी में जुड़ जाएगी. यानी हर महीने हाथ में मिलने वाली सैलरी पहले की तुलना में अधिक हो सकती है. हालांकि, इसका दूसरा पहलू यह भी है कि अतिरिक्त PF योगदान न करने पर भविष्य निधि खाते में जमा होने वाली राशि कम होगी. ऐसे में कर्मचारियों को तत्काल अधिक सैलरी और भविष्य की बचत के बीच संतुलन बनाकर फैसला लेना होगा.
कंपनियों को भी मिलेगा राहत का फायदा
इस बदलाव से केवल कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि कंपनियों को भी राहत मिलेगी. चूंकि अब वैधानिक सीमा से ऊपर PF योगदान अनिवार्य नहीं होगा, इसलिए नियोक्ताओं को भी अधिक बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों पर अतिरिक्त PF योगदान देने की कानूनी बाध्यता नहीं रहेगी. इससे कंपनियों की PF संबंधी लागत कम हो सकती है, जबकि कर्मचारियों को अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं के अनुसार PF योगदान तय करने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी.
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