EPFO New Rules:देशभर में करोड़ों नौकरीपेशा लोगों की बचत से जुड़ा सबसे बड़ा संस्थान कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ अब प्राइवेट PF ट्रस्ट्स को लेकर सख्त हो गया है. ईपीएफओ ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी करते हुए साफ कर दिया है कि अब किसी भी प्राइवेट ट्रस्ट को कर्मचारियों के हितों से समझौता करने की छूट नहीं मिलेगी. नई SOP के मुताबिक, देश के 1250 से ज्यादा प्राइवेट PF ट्रस्ट्स, जो करीब 32 लाख कर्मचारियों की 3.50 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत को मैनेज करते हैं, उन्हें अपने कर्मचारियों को वही सुविधाएं देनी होंगी जो ईपीएफओ देता है.
इतना ही नहीं, कर्मचारियों को मिलने वाले फायदे ईपीएफओ से कम नहीं होने चाहिए. ईपीएफओ का यह कदम ऐसे समय आया है जब कई प्राइवेट ट्रस्ट्स में पारदर्शिता, ब्याज दर और निष्क्रिय खातों को लेकर सवाल उठ रहे थे. ऐसे में नई SOP को कर्मचारियों की बचत को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
क्या होते हैं प्राइवेट PF ट्रस्ट्स?
प्राइवेट या छूट प्राप्त संस्थान वे कंपनियां होती हैं जिन्हें ईपीएफओ की तरफ से विशेष अनुमति दी जाती है. आमतौर पर कंपनियां कर्मचारियों का PF पैसा सीधे ईपीएफओ के केंद्रीय फंड में जमा करती हैं, लेकिन कुछ बड़ी कंपनियां अपना अलग PF ट्रस्ट चलाती हैं. इन ट्रस्ट्स के जरिए कंपनियां कर्मचारियों की PF राशि को खुद मैनेज करती हैं. इसमें कर्मचारियों के खाते संभालना, ब्याज देना और निकासी जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं.
सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की कई बड़ी कंपनियां इस व्यवस्था के तहत काम करती हैं. मिन्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईपीएफओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ कहा है कि अगर कोई प्राइवेट ट्रस्ट नए नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसकी छूट खत्म की जा सकती है.
नई SOP को मिली मंजूरी
ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड यानी CBT ने इस नई SOP को मंजूरी दी है. इस बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया करते हैं. अधिकारियों के मुताबिक, नई SOP मौजूदा चार अलग-अलग SOP और पुरानी छूट नियमावली को मिलाकर एक व्यापक ढांचे में बदलेगी. इसका मकसद नियमों को ज्यादा स्पष्ट बनाना और अनुपालन प्रक्रिया को आसान करना है. ईपीएफओ का मानना है कि इससे संस्थानों पर अनावश्यक प्रशासनिक बोझ कम होगा और कर्मचारियों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी. साथ ही PF से जुड़े मामलों में पारदर्शिता भी बढ़ेगी.
निष्क्रिय खातों पर भी सख्ती
नई SOP में निष्क्रिय खातों और बिना KYC वाले खातों को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं. दस्तावेज के मुताबिक, ऐसे खातों में जमा राशि और उस पर मिलने वाला ब्याज ईपीएफओ में ट्रांसफर करना होगा. ईपीएफओ ने दोहराया है कि प्राइवेट ट्रस्ट्स द्वारा कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ किसी भी हालत में ईपीएफओ से कम नहीं होने चाहिए. दरअसल, लंबे समय से निष्क्रिय पड़े खातों और अधूरी KYC वाले अकाउंट्स को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आ रही थीं. अब नई SOP के जरिए इन खातों को व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है.
मनमाने ब्याज देने पर लगी रोक
नई SOP में प्राइवेट ट्रस्ट्स द्वारा कर्मचारियों को मनमाना ब्याज देने पर भी रोक लगा दी गई है. अब कोई भी ट्रस्ट ईपीएफओ की ब्याज दर से अधिकतम 2% यानी 200 बेसिस पॉइंट्स तक ही ज्यादा ब्याज दे सकेगा. SOP में कहा गया है कि यह फैसला “पीढ़ियों के बीच समानता बनाए रखने” के लिए लिया गया है. ईपीएफओ का मानना है कि बहुत ज्यादा ब्याज देने से भविष्य में फंड मैनेजमेंट पर दबाव बढ़ सकता है.
अधिकारियों के अनुसार, कुछ सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अपने कर्मचारियों को 30 से 34% तक का बेहद ऊंचा ब्याज दे रही थीं. इसी को ध्यान में रखते हुए अब ब्याज सीमा तय कर दी गई है.
छूट पाने वाले संस्थानों में बड़ी-बड़ी कंपनियों के नाम
अगस्त 2024 की EPFO की लिस्टिंग के अनुसार, छूट पाने वाले कुछ संस्थानों में बोकारो स्टील, जिंदल स्टेनलेस, TVS मोटर कंपनी, रेमंड लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड, विप्रो, इंफोसिस, टाटा टी लिमिटेड, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, BHEL, हिंदुस्तान यूनिलीवर, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और NTPC लिमिटेड शामिल हैं.
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