Food Inflation: त्योहारी सीजन में खरीदारी की तैयारी कर रहे आम लोगों के लिए महंगाई को लेकर एक और चिंता सामने आई है. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Citi Research की ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस साल भारत में उम्मीद से कमजोर मानसून का असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में बारिश की कमी और सूखे जैसे हालात के कारण फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में खाद्य कीमतों पर दिखाई दे सकता है.
देश के कुल प्याज उत्पादन में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी करीब 40% है. राज्य में सूखे जैसे हालात के बीच प्याज की कीमतें पिछले साल की तुलना में करीब दोगुनी हो गई हैं. हालांकि, इस साल खरीफ फसलों की कुल बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले 1.2% कम होकर सामान्य स्तर के आसपास बना हुआ है, लेकिन जिन राज्यों में देश का करीब तीन-चौथाई प्याज, दो-तिहाई दालें और आधा चावल पैदा होता है, वहां बारिश में 10% से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है. ऐसे में कमजोर बारिश का असर फसलों की पैदावार पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव का असर अभी से दिखाई देने लगा है.
कमजोर मानसून ने बढ़ाई चिंता
मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन यानी MoSPI की ओर से जारी अगस्त के Consumer Price Index यानी CPI आंकड़ों में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. रिपोर्ट में इसे कमजोर मानसून से जुड़े असर के तौर पर देखा गया है. सितंबर में भी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहा. प्याज के अलावा चीनी, चावल और दालों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली. रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कुछ हिस्सों में कमजोर मानसून के कारण सूखे जैसी स्थिति बनने से कृषि उत्पादन पर दबाव बढ़ा है.
Citi Research की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 के आखिर तक देश के करीब 49.4% से अधिक हिस्से में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई थी. यह आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों की तुलना में काफी ज्यादा है. साल 2023 में देश का करीब 30% हिस्सा सूखे की स्थिति से प्रभावित था, जबकि इस साल सितंबर के अंत तक यह आंकड़ा बढ़कर करीब 50% तक पहुंच गया है. इनमें लगभग 10% हिस्सा ऐसा भी है, जहां हालात और ज्यादा गंभीर बताए गए हैं.
महाराष्ट्र और पंजाब में स्थिति चिंताजनक
बड़े राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र और पंजाब में भी सूखे जैसे हालात का असर दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के करीब 84% और पंजाब के 80% हिस्से में ऐसी स्थिति बनी हुई है. सरकारी आंकड़ों के साथ IIT-Gandhinagar के डेटा के अनुसार, महाराष्ट्र में 358 में से 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है. यह राज्य के करीब 74% हिस्से के प्रभावित होने के बराबर है. इनमें करीब 37% हिस्सा ऐसा है, जहां सूखे की स्थिति काफी गंभीर बताई गई है. भारत में इस साल लंबे समय के औसत के मुकाबले करीब 12% कम बारिश दर्ज की गई है. रिपोर्ट में इसका प्रमुख कारण अल नीनो की स्थिति को बताया गया है. 2015 के बाद से यह मानसून में दर्ज की गई सबसे बड़ी कमी बताई जा रही है, जिससे खरीफ फसलों की पैदावार को लेकर चिंता बढ़ गई है.
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