Freshers Jobs 2026: भारत में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं और फ्रेश ग्रेजुएट्स के लिए अच्छी खबर सामने आई है. वर्ष 2026 की दूसरी छमाही यानी जुलाई से दिसंबर के दौरान फ्रेशर्स के लिए रोजगार के अवसर बेहतर होने की उम्मीद है. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 75 प्रतिशत नियोक्ता फ्रेशर्स की भर्ती करने की योजना बना रहे हैं. पहली छमाही में यह आंकड़ा 73 प्रतिशत था. यानी एंट्री-लेवल नौकरियों को लेकर कंपनियों के भरोसे में मामूली बढ़ोतरी हुई है.
टीमलीज एडटेक की रिपोर्ट के अनुसार, रिटेल, ई-कॉमर्स, टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर फ्रेश ग्रेजुएट्स की मांग बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. इन क्षेत्रों में ऐसे युवाओं के लिए अवसर बढ़ रहे हैं, जिनके पास डिग्री के साथ व्यावहारिक और इंडस्ट्री से जुड़ा कौशल है.
सभी सेक्टर्स में नहीं बढ़ी फ्रेशर्स की डिमांड
हालांकि, फ्रेशर्स के लिए नौकरी का बाजार हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं है. रिपोर्ट में कुछ सेक्टर्स में नए उम्मीदवारों को हायर करने की इच्छा में कमी की भी बात कही गई है. आईटी सेक्टर में फ्रेशर्स को नियुक्त करने की मंशा वर्ष की पहली छमाही के 81 प्रतिशत से घटकर 76 प्रतिशत रह गई है. वहीं कंसल्टिंग, टेलीकॉम और मार्केटिंग एवं विज्ञापन सेक्टर्स में फ्रेशर्स की भर्ती की इच्छा में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. इसके अलावा मीडिया एवं एंटरटेनमेंट और शिक्षा सेवाओं के क्षेत्र में भी फ्रेशर हायरिंग इंटेंट में 2 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है.
डिग्री से ज्यादा स्किल पर कंपनियों का फोकस
टीमलीज एडटेक के संस्थापक एवं सीईओ शांतनु रूज के मुताबिक, कंपनियों की प्राथमिकता अब केवल डिग्री तक सीमित नहीं है. नियोक्ता ऐसे उम्मीदवारों की तलाश कर रहे हैं, जिनके पास काम के लिए जरूरी व्यावहारिक और जॉब-रेडी स्किल्स हों. उन्होंने कहा कि रिटेल, ई-कॉमर्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भर्ती बढ़ रही है, क्योंकि इन सेक्टर्स को ऐसे उम्मीदवार मिल रहे हैं जिनके पास काम से जुड़े कौशल हैं.
वहीं आईटी और कंसल्टिंग कंपनियां एआई दक्षता, समस्या समाधान क्षमता और वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम करने के अनुभव को प्राथमिकता दे रही हैं. शांतनु रूज के अनुसार, उच्च शिक्षा और कौशल विकास को एक साथ जोड़ना अब जरूरी हो गया है, ताकि छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद ऐसे कौशल के साथ निकलें जिनकी उद्योगों में वास्तविक मांग है.
बेंगलुरु फ्रेशर्स की भर्ती में सबसे आगे
शहरों के आधार पर देखें तो बेंगलुरु फ्रेशर्स की भर्ती के मामले में सबसे आगे है. रिपोर्ट के अनुसार, यहां करीब 90 प्रतिशत कंपनियां नए उम्मीदवारों को नियुक्त करने की योजना बना रही हैं. बेंगलुरु के बाद मुंबई में 75 प्रतिशत और चेन्नई में 71 प्रतिशत कंपनियां फ्रेशर्स को हायर करने की योजना बना रही हैं. इससे संकेत मिलता है कि देश के प्रमुख रोजगार केंद्रों में एंट्री-लेवल टैलेंट की मांग अभी भी बनी हुई है.
इन स्किल्स वाले युवाओं को मिल सकते हैं ज्यादा मौके
रिपोर्ट में कुछ ऐसे स्किल-बेस्ड सर्टिफिकेट्स की भी पहचान की गई है, जो युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं. इनमें VLSI चिप डिजाइन, AI इंजीनियरिंग, क्लाउड सिक्योरिटी, डिजिटल मार्केटिंग एनालिटिक्स और गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (GMP) जैसे कोर्स शामिल हैं. ऐसे में फ्रेशर्स के लिए सिर्फ डिग्री हासिल करना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा है. इंडस्ट्री की जरूरत के मुताबिक तकनीकी और व्यावहारिक कौशल विकसित करना नौकरी के बेहतर अवसर हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
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