Gold ETF India: एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया के मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में निवेश में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. मार्च के दौरान गोल्ड ETF में शुद्ध निवेश घटकर 2,266 करोड़ रुपए रह गया, जो फरवरी के 5,255 करोड़ रुपए के मुकाबले आधे से भी कम है. यह गिरावट निवेशकों के बदलते रुझान और बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को दर्शाती है.
भू-राजनीतिक तनाव बना बड़ा कारण
इस गिरावट की प्रमुख वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और खासकर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव को माना जा रहा है. इस तरह के हालात में आमतौर पर सोना सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस बार निवेशकों का रुख कुछ अलग नजर आया, जिससे गोल्ड ETF में इनफ्लो घट गया.
सोने की कीमतों में गिरावट का असर
मार्च के दौरान घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में करीब 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. यह गिरावट बेंचमार्क निफ्टी 50 इंडेक्स में आई गिरावट के लगभग बराबर रही. कीमतों में इस गिरावट ने निवेशकों की रुचि को कमजोर किया और गोल्ड ETF में निवेश कम हो गया.
फिर भी मजबूत रहा AUM
इनफ्लो में गिरावट के बावजूद गोल्ड ETF का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट मजबूत बना रहा. 31 मार्च तक यह 1.71 लाख करोड़ रुपए पर कायम रहा, जो पहले सोने की कीमतों में आई तेजी के कारण बढ़ा था. इससे संकेत मिलता है कि लंबी अवधि में निवेशकों का भरोसा अभी भी इस सेगमेंट में बना हुआ है.
वैश्विक स्तर पर भी भारी निकासी
वैश्विक बाजार में स्थिति और भी कमजोर रही. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में गोल्ड ETF से 12 अरब डॉलर की निकासी हुई, जो अब तक की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है. इससे उन उम्मीदों को झटका लगा है, जिनमें माना जा रहा था कि यह तिमाही गोल्ड ETF निवेश के लिए मजबूत रहेगी.
लंबी अवधि में बना हुआ है भरोसा
हालांकि अल्पकालिक गिरावट के बावजूद, वैश्विक स्तर पर गोल्ड ETF में लगातार सातवीं तिमाही में शुद्ध निवेश दर्ज किया गया है. यह दर्शाता है कि दीर्घकालिक नजरिए से निवेशक अभी भी सोने को एक सुरक्षित और स्थिर विकल्प मानते हैं.
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