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भारत का जीएसटी 2.0 सुधार, कस्टम ड्यूटी में कटौती और भारत-जापान मुक्त व्यापार समझौता मिलकर देश की ऑटोमोबाइल उद्योग के भविष्य को आकार दे रहे हैं, सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई, ग्रांट थॉर्नटन भारत और इंडो-जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (IJCCI) द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया कि सितंबर में लागू हुआ जीएसटी 2.0 ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहा है, इससे कर प्रणाली अधिक सरल बनी है, वाहन की कीमतों में कमी आई है और सभी श्रेणियों में वाहनों की मांग बढ़ी है,
नई जीएसटी दरों के तहत, छोटी कारों और 350 सीसी से कम क्षमता वाली मोटरसाइकिलों पर अब 18 प्रतिशत जीएसटी लग रहा है, जो पहले के 28 प्रतिशत टैक्स प्लस सेस से कम है, इसके परिणामस्वरूप, चुनिंदा मॉडलों की कीमतों में 1 लाख रुपए तक की कमी देखी गई है, दूसरी तरफ एसयूवी और हाई-एंड मोटरसाइकिलों सहित प्रीमियम वाहनों पर अब 40 प्रतिशत जीएसटी लग रहा है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी 5 प्रतिशत है,
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि जीएसटी दरों में कमी के बाद वाहनों के प्रति ग्राहकों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है, जिससे स्मॉल कार सेगमेंट की बुकिंग में 50 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है, भारत की ऑटोमोबाइल उद्योग का जीडीपी में 7.1 प्रतिशत योगदान है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है, वर्ष 2024 में देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने 28 मिलियन वाहनों का उत्पादन किया, जो 2023 की तुलना में 8 प्रतिशत ज्यादा है,
ग्रांट थॉर्नटन भारत के सोहराब बरारिया ने कहा, जीएसटी 2.0 और टारगेटेड कस्टम इंसेंटिव का मिश्रण भारत के ऑटोमोटिव क्षेत्र के लिए एक निर्णायक क्षण है, कम कर दरें, सरलीकृत अनुपालन और आपूर्ति-श्रृंखला-केंद्रित छूट न केवल भारत की लागत प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएंगी, बल्कि जापानी वाहन निर्माताओं के लिए एक मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात केंद्र के रूप में इसकी स्थिति को भी मजबूत करेंगी, रिपोर्ट के अनुसार, इन सुधारों से देश में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार भी तेज होगी, इसके साथ ही, मोबिलिटी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्रों में भारत और जापान के बीच सहयोग और अधिक सुदृढ़ होने की उम्मीद है,
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