होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच ओपेक प्लस ने बढ़ाया उत्पादन, कुवैत का तेल निर्यात शून्य

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल बाजार को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है. ओपेक प्लस देशों ने जून महीने के लिए अपने कच्चे तेल उत्पादन कोटे में बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब अमेरिका-ईरान टकराव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है और वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ओपेक प्लस के सात सदस्य देशों ने जून के लिए कच्चे तेल के उत्पादन में लगभग 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी पर सहमति जताई है.हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए इस बढ़ोतरी को सीमित प्रभाव वाला माना जा रहा है, क्योंकि नाकाबंदी के कारण वास्तविक सप्लाई पहले से प्रभावित है.

लगातार तीसरी मासिक बढ़ोतरी

भू-राजनीतिक संकट और संयुक्त अरब अमीरात के समूह से अलग होने के बावजूद, यह लगातार तीसरी बार है जब ओपेक प्लस उत्पादन बढ़ाने का फैसला कर रहा है. यूएई के बाहर होने के बाद अब ओपेक प्लस में ईरान सहित कुल 21 सदस्य देश रह गए हैं. हालांकि, उत्पादन से जुड़े मासिक फैसलों में केवल सात देशों की ही मुख्य भूमिका रहती है.

ईरान के निर्यात पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी का असर ईरान के तेल निर्यात पर साफ दिख रहा है. निर्यात में आई गिरावट ने पूरे क्षेत्र के तेल व्यापार को प्रभावित किया है, जिससे वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है.

उत्पादन के आंकड़े

आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में ओपेक प्लस सदस्य देशों का औसत कच्चा तेल उत्पादन 35.06 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, जो फरवरी के मुकाबले 7.70 मिलियन बैरल प्रतिदिन कम है. यह गिरावट मौजूदा संकट की गंभीरता को दर्शाती है.

यूएई के अलग होने से असर

पिछले सप्ताह संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ओपेक और ओपेक प्लस कार्टेल से अलग होने की घोषणा की. इसे सऊदी अरब के नेतृत्व वाले इस समूह के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. यूएई ने अपने इस फैसले को दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से जुड़ा बताया है, जो उसकी बदलती ऊर्जा प्राथमिकताओं को दर्शाता है.

तेल कार्टेल पर बढ़ा दबाव

यूएई के बाहर निकलने से ओपेक की एकजुटता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. ऐसे समय में जब ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से फारस की खाड़ी के देशों के तेल निर्यात पर भारी असर पड़ा है, यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण बन गई है. ओपेक के कुल निर्यात में यूएई की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत रही है.

कुवैत की स्थिति

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुवैत ने अप्रैल में कच्चे तेल का शून्य बैरल निर्यात दर्ज किया, जो 1991 के बाद पहली बार है. यह स्थिति होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के कारण उत्पन्न हुई है. कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने फोर्स मेज्योर घोषित किया है, जिससे करीब 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन उत्पादन प्रभावित हुआ है. नाकाबंदी के चलते कुवैत का तेल निर्यात लगभग पूरी तरह ठप हो गया है.

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