भारत में Drone Industry का बूम. खेती में 80% बचत, बाजार 17,000 करोड़ पार

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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India Drone Industry Growth: भारत में कमर्शियल ड्रोन इंडस्ट्री तेजी से विस्तार कर रही है और यह अब देश के उभरते हुए टेक सेक्टर में एक बड़ा योगदान देने लगी है. एक नई रिपोर्ट के अनुसार, FY26 तक इस सेक्टर का बाजार आकार 1.88 अरब डॉलर यानी करीब 17,000 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है. अनुमान है कि FY25 से 2029 के बीच यह उद्योग लगभग 17.98% की वार्षिक दर से बढ़ेगा, जो इसकी तेज रफ्तार को दर्शाता है.

वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति

रिसर्च फर्म B2K Analytics की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कमर्शियल ड्रोन बाजार में अमेरिका पहले स्थान पर है, उसके बाद चीन का नंबर आता है. भारत फिलहाल सातवें स्थान पर है, लेकिन जिस तेजी से यह सेक्टर बढ़ रहा है, उससे आने वाले समय में भारत की रैंकिंग और बेहतर होने की संभावना है.

खेती में ड्रोन बना गेम चेंजर

रिपोर्ट में बताया गया है कि ड्रोन तकनीक खेती में लागत कम करने का बड़ा जरिया बन रही है. खासकर एग्रोकेमिकल छिड़काव में ड्रोन के इस्तेमाल से लागत लगभग 80 प्रतिशत तक कम हो सकती है. इससे किसानों को कम खर्च में ज्यादा काम करने में मदद मिल रही है.

लागत ज्यादा, लेकिन फायदा कहीं अधिक

अध्ययन में 6.4 से 7.1 लाख रुपए कीमत वाले छोटे और मध्यम ड्रोन का विश्लेषण किया गया, जिनकी कार्य अवधि लगभग तीन साल मानी गई है. इसकी तुलना में मैनुअल मजदूरी पर हर साल करीब 1.7 लाख रुपए खर्च होते हैं. हालांकि ड्रोन की शुरुआती लागत अधिक होती है, लेकिन उनकी कार्यक्षमता और तेजी उन्हें लंबे समय में ज्यादा किफायती बनाती है.

समय और दक्षता में बड़ा अंतर

ड्रोन उतने समय में 6 से 6.6 एकड़ जमीन पर काम कर सकते हैं, जितना समय एक मजदूर केवल एक एकड़ में लगाता है. रिपोर्ट के अनुसार, दक्षता और लागत दोनों को मिलाकर देखें तो ड्रोन मैनुअल श्रम के मुकाबले 78 प्रतिशत से अधिक किफायती साबित होते हैं.

DGCA से सर्टिफाइड ड्रोन मॉडल्स

भारत में इस समय 122 ड्रोन मॉडल्स को DGCA द्वारा टाइप सर्टिफिकेट दिया जा चुका है. यह प्रमाणन सुनिश्चित करता है कि ये ड्रोन सुरक्षा, उड़ान क्षमता और प्रदर्शन के मानकों पर खरे उतरते हैं.

कृषि में सबसे ज्यादा उपयोग

इनमें से करीब 70 प्रतिशत ड्रोन कृषि कार्यों, खासकर छिड़काव के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं. वहीं, लगभग 24 प्रतिशत ड्रोन सर्विलांस और मैपिंग के काम में उपयोग हो रहे हैं. इससे साफ है कि फिलहाल भारत में ड्रोन तकनीक का सबसे बड़ा उपयोग खेती में हो रहा है.

सरकार की नीतियों से मिला बढ़ावा

सरकार की नीतियों ने भी इस सेक्टर को मजबूती दी है. तैयार ड्रोन के आयात पर रोक और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना ने स्थानीय निर्माण और रिसर्च को बढ़ावा दिया है. इसके अलावा Namo Drone Didi Yojana के तहत महिलाओं को ड्रोन तकनीक से जोड़ा जा रहा है.

तेजी से बढ़ेगा बाजार

रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के बाद अब अन्य राज्यों में भी खेती में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा. इससे आने वाले वर्षों में इस सेक्टर में बड़ा बाजार तैयार होने की संभावना है.

ग्रीन जोन का बड़ा फायदा

भारत का लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र ग्रीन जोन में आता है, जहां ड्रोन उड़ाने के लिए पहले से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती. यह सुविधा इस उद्योग के विस्तार में एक बड़ा कारक बन रही है.

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