India Economy: भारत ने 2026 की दूसरी छमाही की शुरुआत कई सकारात्मक आर्थिक संकेतों के साथ की है. विदेशी निवेशकों की वापसी, मानसून की स्थिति में सुधार, घरेलू मांग और कंपनियों की आय में मजबूती ने अर्थव्यवस्था को लेकर उम्मीद बढ़ाई है. हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और दुनिया भर में ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण बाजार में व्यापक तेजी की संभावना अभी सीमित मानी जा रही है. पीएल वेल्थ के अगस्त 2026 के ताजा मार्केट आउटलुक में यह आकलन सामने आया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था की रफ्तार फिलहाल मजबूत बनी हुई है और कई संकेतक आर्थिक गतिविधियों में मजबूती की ओर इशारा कर रहे हैं.
निवेशकों को सोच-समझकर निवेश की सलाह
पीएल वेल्थ के सीईओ इंदरबीर जॉली ने कहा कि मौजूदा माहौल में निवेशकों को सोच-समझकर निवेश करने, बेहतर गुणवत्ता वाले विकल्पों पर ध्यान देने और किस्तों में निवेश करने की रणनीति अपनानी चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत को लेकर लंबी अवधि का भरोसा कायम है. इसके पीछे घरेलू निवेश, वित्तीय क्षेत्र का विस्तार, देश की डेमोग्राफिक स्थिति और स्ट्रक्चरल ग्रोथ के अवसर प्रमुख आधार हैं.
घरेलू विकास की रफ्तार मजबूत
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की घरेलू विकास दर को कई सकारात्मक कारकों से समर्थन मिल रहा है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक यानी एफपीआई फिर से नेट खरीदार बने हैं. इसके अलावा मानसून में सुधार और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के कंपनियों के नतीजों की स्थिर शुरुआत ने भी आर्थिक माहौल को सहारा दिया है. भारत की वित्त वर्ष 2026 की जीडीपी विकास दर का शुरुआती अनुमान 7.7 प्रतिशत है. वहीं, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.7 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान लगाया है.
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में जारी रही तेजी
जुलाई में देश के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियां विस्तार के दायरे में बनी रहीं. इस दौरान मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 53.9 और सर्विस पीएमआई 53.1 रहा. बैंक क्रेडिट ग्रोथ भी सालाना आधार पर बढ़कर 18.6 प्रतिशत हो गई. इससे जून 2026 तक कुल बकाया क्रेडिट 219.3 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया. वहीं, कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 75.2 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर बना रहा, जो इसके लंबे समय के औसत से ऊपर है.
महंगाई ने बढ़ाई चिंता
हालांकि, महंगाई के मोर्चे पर अभी निगरानी जरूरी है. जुलाई में सीपीआई महंगाई बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गई, जो आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसके पीछे मुख्य वजह खाद्य वस्तुओं की महंगाई में बढ़ोतरी रही. आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए सीपीआई महंगाई का अनुमान 5.1 प्रतिशत पर बरकरार रखा है. वहीं, तीसरी तिमाही में इसके 5.9 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई गई है.
जुलाई में एफपीआई बने नेट खरीदार
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत रही हैं. साल की पहली छमाही में लगातार इक्विटी से पैसा निकालने के बाद जुलाई में एफपीआई फिर नेट खरीदार बने. जुलाई में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने करीब 20,200 करोड़ रुपये का इक्विटी निवेश किया. फरवरी के बाद यह पहला महीना रहा, जब एफपीआई का इक्विटी निवेश सकारात्मक रहा.
मानसून में भी हुआ सुधार
रिपोर्ट में मानसून की स्थिति में सुधार को भी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत बताया गया है. जुलाई में बारिश सामान्य स्तर से करीब 1 प्रतिशत अधिक रही. इससे जून-जुलाई के दौरान बारिश की कुल कमी घटकर लंबे समय के औसत से लगभग 13 प्रतिशत नीचे रह गई. मानसून में सुधार से घरेलू आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने की उम्मीद बनी है.
बाहरी दबावों के बावजूद भारत का मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल काफी मजबूत बना हुआ है. हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बाजार के लिए चुनौती बनी हुई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बाहरी मोर्चे पर व्यापार से जुड़ी गतिविधियां मध्यम अवधि में भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई हैं.
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