India Energy Capacity: भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बीते एक दशक से ज्यादा समय में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. जुलाई 2026 तक देश की कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता बढ़कर 552 गीगावाट हो गई है, जो 2014 में 249 गीगावाट थी. खास बात यह है कि अब कुल स्थापित क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है.
31 जुलाई 2026 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा की स्थापित क्षमता 300.50 गीगावाट पहुंच चुकी है. इसमें सौर और पवन ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है, जबकि ऊर्जा सुरक्षा और बिजली की जरूरतों को पूरा करने में कोयला अब भी महत्वपूर्ण बना हुआ है.
भारत की सोलर क्षमता 164.59 GW पहुंची
भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में सोलर पावर अब सबसे बड़ा हिस्सा बन चुकी है. 31 जुलाई 2026 तक देश की स्थापित सोलर एनर्जी क्षमता 164.59 गीगावाट हो गई, जबकि 2014 में यह महज 2.8 गीगावाट थी. फैक्टशीट के अनुसार, 2025 में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट बना. इस दौरान देश ने 37 गीगावाट से ज्यादा सोलर क्षमता जोड़ी, जबकि अमेरिका ने 34 गीगावाट क्षमता जोड़ी थी. वैश्विक स्तर पर स्थापित रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के मामले में भारत तीसरे स्थान पर है.
पीएम-सूर्य घर योजना से लाखों घरों को फायदा
रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए फरवरी 2024 में पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शुरू की गई थी. इस योजना का लक्ष्य 1 करोड़ घरों तक रूफटॉप सोलर पहुंचाना है और इसके लिए कुल 75,021 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था. 12 अगस्त 2026 तक देशभर में 51.58 लाख घरों को इस योजना के तहत रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का लाभ मिल चुका है. लाभार्थियों को करीब 28,024 करोड़ रुपये की सब्सिडी ट्रांसफर की गई है. फैक्टशीट के मुताबिक, अब तक करीब 19 लाख घरों का बिजली बिल जीरो आ रहा है. वहीं, योजना के तहत कुल 14.8 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की जा चुकी है.
विंड एनर्जी में भी भारत की स्थिति मजबूत
सौर ऊर्जा के साथ पवन ऊर्जा भी भारत के रिन्यूएबल एनर्जी विस्तार का अहम हिस्सा बनी हुई है. 31 जुलाई 2026 तक देश की स्थापित विंड एनर्जी क्षमता 58.14 गीगावाट हो गई है. स्थापित विंड पावर क्षमता के मामले में भारत दुनिया में चौथे स्थान पर है. इस क्षेत्र में क्षमता विस्तार के साथ घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा मिल रहा है. FY25-26 में भारत ने 6.05 गीगावाट नई विंड एनर्जी क्षमता जोड़ी. यह देश में अब तक की सबसे ज्यादा सालाना विंड क्षमता वृद्धि है और FY24-25 की तुलना में करीब 46 प्रतिशत ज्यादा है. इसके अलावा करीब 28 गीगावाट की अतिरिक्त विंड क्षमता पर काम चल रहा है.
बढ़ी विंड टरबाइन बनाने की क्षमता
भारत में विंड टरबाइन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भी पिछले वर्षों में तेजी से बढ़ी है. मार्च 2026 तक यह क्षमता बढ़कर करीब 24 गीगावाट हो गई, जबकि 2014 में यह 10 गीगावाट थी. इस क्षेत्र में मुख्य कंपोनेंट्स के मामले में करीब 70-80 प्रतिशत स्वदेशीकरण हासिल किया जा चुका है. इससे घरेलू स्तर पर विंड एनर्जी से जुड़े उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा मिला है.
ऊर्जा सुरक्षा में अब भी कोयले की बड़ी भूमिका
रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार के बावजूद भारत की ऊर्जा सुरक्षा और बिजली आपूर्ति में कोयला अब भी अहम भूमिका निभा रहा है. कोयला देश की प्राथमिक ऊर्जा जरूरतों का करीब 55 प्रतिशत पूरा करता है, जबकि बिजली उत्पादन में इसका योगदान 70 प्रतिशत से ज्यादा है. भारत के पास करीब 4,00,715 मिलियन टन कोयले का भंडार है. देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक और उपभोक्ता है.
कोयला उत्पादन की बात करें तो FY24-25 में भारत ने 1,047.52 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया. वित्त वर्ष 2025-26 में यह उत्पादन 1,040.08 मिलियन टन रहा. इसकी तुलना में FY14-15 में देश का कोयला उत्पादन 609.18 मिलियन टन था. इस तरह भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक ओर सौर और पवन जैसी स्वच्छ ऊर्जा की क्षमता तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर बिजली की मौजूदा जरूरतों को पूरा करने में कोयले की भूमिका भी बनी हुई है.
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