भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर मजबूती देखने को मिली है. 3 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 9.063 अरब डॉलर बढ़कर 697.121 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी ताजा आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद अब भंडार ने जोरदार रिकवरी की है. इससे पहले वाले सप्ताह में 10.288 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे बाजार में चिंता बनी हुई थी.
सोने के भंडार ने बढ़ाया रिजर्व
इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ी भूमिका गोल्ड रिजर्व की रही है. सप्ताह के दौरान गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 7.221 अरब डॉलर बढ़कर 120.742 अरब डॉलर हो गई. यह इजाफा दिखाता है कि भारत अपने स्वर्ण भंडार को लगातार मजबूत कर रहा है, जो आर्थिक स्थिरता के लिए अहम माना जाता है.
फॉरेन करेंसी एसेट्स में भी सुधार
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट्स होता है, जिसमें भी इस सप्ताह सुधार दर्ज किया गया. इसकी वैल्यू 1.784 अरब डॉलर बढ़कर 552.856 अरब डॉलर हो गई. इसमें डॉलर के अलावा यूरो, येन और पाउंड जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं शामिल होती हैं, जिनकी कीमत डॉलर में आंकी जाती है.
SDR में मामूली बढ़त, IMF स्थिति स्थिर
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, विशेष आहरण अधिकार यानी SDR में भी हल्की बढ़त दर्ज की गई है और यह 5.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.707 अरब डॉलर हो गया. वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत की रिजर्व स्थिति 4.816 अरब डॉलर पर स्थिर बनी हुई है.
क्यों अहम है विदेशी मुद्रा भंडार
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण संकेतक होता है. यह न केवल देश की वित्तीय स्थिति को मजबूत करता है, बल्कि मुद्रा की विनिमय दर को संतुलित रखने में भी मदद करता है. जब रुपये पर दबाव बढ़ता है, तब केंद्रीय बैंक इसी भंडार का उपयोग कर बाजार में स्थिरता बनाए रखता है.
मजबूत रिजर्व से बढ़ता भरोसा
विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि देश में विदेशी मुद्रा की आवक मजबूत बनी हुई है. इससे न केवल अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के लिए भी सकारात्मक माहौल बनता है. यह संकेत देता है कि भारत की आर्थिक स्थिति वैश्विक स्तर पर मजबूत बनी हुई है.
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