IMF ने भारत की अर्थव्यवस्था पर जताया भरोसा, GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7% किया

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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India GDP Growth Forecast: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और ऊर्जा संकट के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर अपनी मजबूती दिखाई है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की आर्थिक बुनियाद, मजबूत घरेलू मांग और नीतिगत फैसलों की सराहना की है. IMF के मुताबिक, भारत वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय झटकों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सफल रहा है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बनाए हुए है.

भारत के बेहतर आर्थिक प्रदर्शन को देखते हुए IMF ने चालू वर्ष और अगले वर्ष के लिए देश की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया है. बैंकॉक में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान IMF के एशिया और प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने कहा कि भारत ने बाहरी चुनौतियों के बावजूद मजबूत आर्थिक वृद्धि और वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है. हालांकि, आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही थी.

IMF ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले समय में भी मजबूत प्रदर्शन कर सकती है. IMF ने चालू वर्ष और अगले वर्ष, दोनों के लिए भारत की आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. वहीं, मध्यम अवधि में विकास दर लगभग 6.9 प्रतिशत रहने की संभावना व्यक्त की गई है. भारत की आर्थिक वृद्धि के पीछे घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र की मजबूत गतिविधियां और लगातार बढ़ता बाजार अहम भूमिका निभा रहे हैं. इसके अलावा, देश की अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति और संरचनात्मक सुधारों को भी विकास के प्रमुख आधारों में शामिल किया गया है.

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत ने कैसे दिखाई मजबूती?

IMF के एशिया और प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन के मुताबिक, हालिया ऊर्जा संकट के दौरान भारत की आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत थी. देश ने आर्थिक विकास और वित्तीय अनुशासन के सहारे बाहरी चुनौतियों का सामना किया. भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर देश की अर्थव्यवस्था, आयात बिल और महंगाई पर पड़ सकता है.

इसके बावजूद भारत की मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों ने विकास को सहारा दिया है. IMF का मानना है कि भारत की आर्थिक बुनियाद उसे वैश्विक वित्तीय और ऊर्जा संबंधी उतार-चढ़ाव से निपटने में मदद करती है. यही वजह है कि क्षेत्रीय स्तर पर कई अर्थव्यवस्थाओं की विकास संभावनाएं कमजोर होने के बीच भारत का प्रदर्शन बेहतर रहा है.

रुपये में गिरावट पर IMF ने क्या कहा?

भारतीय रुपये पर हाल में बने दबाव को लेकर भी IMF ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. कृष्णा श्रीनिवासन ने कहा कि रुपये की चाल को सीधे आर्थिक कमजोरी का संकेत नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी देश की मुद्रा की विनिमय दर कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रभावित होती है. वैश्विक ब्याज दरें, निवेशकों की धारणा और कच्चे तेल की कीमतें ऐसे प्रमुख कारक हैं, जिनका असर रुपये पर पड़ सकता है. भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों में बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है. IMF के अनुसार, किसी अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का आकलन केवल उसकी मुद्रा की मजबूती या कमजोरी के आधार पर नहीं किया जा सकता. इसके लिए आर्थिक विकास, घरेलू मांग, निवेश और अन्य व्यापक आर्थिक संकेतकों को भी ध्यान में रखना जरूरी है.

भारत की नई GDP गणना पद्धति का IMF ने किया समर्थन

IMF ने भारत की संशोधित GDP गणना पद्धति का भी समर्थन किया है. श्रीनिवासन के मुताबिक, भारत की राष्ट्रीय आय की गणना में किए गए बदलाव अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं और IMF की पहले दी गई सिफारिशों के अनुरूप हैं. उन्होंने सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की. GDP की गणना किसी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं के कुल उत्पादन का आकलन करने का महत्वपूर्ण माध्यम है. इसकी पद्धति में सुधार से आर्थिक गतिविधियों की तस्वीर को अधिक बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है.

एशिया की कई अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत का प्रदर्शन बेहतर

क्षेत्रीय आर्थिक हालात पर चर्चा करते हुए IMF ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण एशिया की कई अर्थव्यवस्थाओं की विकास संभावनाएं कुछ कमजोर हुई हैं. इसके बावजूद भारत ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन करके सकारात्मक आश्चर्य दिया है. मजबूत घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र की गतिविधियों, बड़े उपभोक्ता बाजार और संरचनात्मक सुधारों ने भारत की आर्थिक वृद्धि को सहारा दिया है. IMF के संशोधित अनुमान से संकेत मिलता है कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भी भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी विकास गति बनाए रखने की स्थिति में है.

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