Jackfruit Peel Water Purification: जिस कटहल के छिलके को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, वही अब दूषित पानी को साफ करने में उपयोगी साबित हो सकता है. राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) राउरकेला के शोधकर्ताओं ने कटहल के छिलकों से ऐसी विशेष सामग्री विकसित की है, जो प्रयोगशाला परीक्षणों में महज 10 से 20 मिनट के भीतर पानी से 90 से 97 प्रतिशत से अधिक फ्लोराइड हटाने में सफल रही.
इस नवाचार को पेटेंट भी मिल चुका है.इस तकनीक में कटहल के छिलकों से सक्रिय कार्बन तैयार किया जाता है और फिर उसमें जिरकोनियम मिलाकर फ्लोराइड को पानी से हटाने की क्षमता बढ़ाई जाती है. यह शोध उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी विकल्प विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है, जहां भूजल में फ्लोराइड की अधिक मात्रा पेयजल की गुणवत्ता को प्रभावित करती है. हालांकि, अभी तक मिले परिणाम प्रयोगशाला परीक्षणों पर आधारित हैं और वास्तविक परिस्थितियों में इसकी प्रभावशीलता का आकलन किया जाना बाकी है.
कटहल के छिलके से कैसे साफ होगा पानी?
इस तकनीक को विकसित करने के लिए शोधकर्ताओं ने कटहल के छिलकों का इस्तेमाल किया. सबसे पहले छिलकों से सक्रिय कार्बन तैयार किया गया. इसके बाद इस सामग्री को जिरकोनियम से संशोधित किया गया, ताकि पानी में मौजूद फ्लोराइड को पकड़ने और हटाने की इसकी क्षमता बढ़ सके. शोध दल के अनुसार, प्रयोगशाला में इस सामग्री का परीक्षण ऐसे पानी पर किया गया, जिसमें फ्लोराइड की मात्रा 1 से 5 मिलीग्राम प्रति लीटर थी.
परीक्षण के दौरान 10 से 20 मिनट के भीतर 90 से 97% से अधिक फ्लोराइड हटाने की क्षमता दर्ज की गई. शुरुआती नतीजों से संकेत मिलता है कि कृषि अपशिष्ट से तैयार यह सामग्री पानी से फ्लोराइड हटाने के वैकल्पिक तरीके के रूप में विकसित की जा सकती है.
NIT राउरकेला की टीम ने विकसित की तकनीक
इस शोध को NIT राउरकेला की प्रोफेसर सुस्मिता मिश्रा और शोधार्थी डॉ. प्रतिमा मिंज के शोध दल ने विकसित किया है. प्रोफेसर मिश्रा के मुताबिक, शोध का मुख्य उद्देश्य कृषि अपशिष्ट का उपयोग करके पानी को शुद्ध करने की उपयोगी तकनीक तैयार करना था. कटहल के छिलकों से तैयार सक्रिय कार्बन को जिरकोनियम से संशोधित करने के बाद प्रयोगशाला में उत्साहजनक परिणाम मिले. इस नवाचार को पेटेंट भी मिल चुका है और शोध को प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर-4 तक पहुंचाया गया है.
पानी से फ्लोराइड हटाना क्यों जरूरी है?
भूजल में फ्लोराइड की अधिक मात्रा कई क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता से जुड़ी समस्या है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, लंबे समय तक अधिक मात्रा में फ्लोराइड युक्त पानी पीने से फ्लोरोसिस हो सकता है, जिससे दांतों और हड्डियों पर असर पड़ सकता है. इसी वजह से ऐसे क्षेत्रों में पानी से अतिरिक्त फ्लोराइड हटाने के लिए सस्ती और टिकाऊ तकनीकों की जरूरत महसूस की जाती है. कटहल के छिलकों से तैयार सामग्री इसी दिशा में एक संभावित विकल्प बन सकती है.
मौजूदा जल शोधन तकनीकों से कैसे अलग है यह तरीका?
पानी से फ्लोराइड हटाने के लिए कई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन उनकी कुछ सीमाएं भी हैं. उदाहरण के लिए, रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) प्रक्रिया में पानी का कुछ हिस्सा अपशिष्ट के रूप में निकल सकता है. इस प्रक्रिया में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे उपयोगी खनिज भी कम हो सकते हैं. वहीं, कुछ दूसरी विधियों में रसायनों का इस्तेमाल करना पड़ता है. इसके मुकाबले कटहल के छिलकों से तैयार सक्रिय कार्बन और जिरकोनियम आधारित सामग्री कृषि अपशिष्ट का उपयोग करके फ्लोराइड हटाने का एक वैकल्पिक तरीका पेश करती है. हालांकि, इसकी वास्तविक उपयोगिता और मौजूदा तकनीकों के मुकाबले प्रदर्शन का आकलन आगे के परीक्षणों के आधार पर ही किया जा सकेगा.
एक ग्राम सामग्री तैयार करने में करीब 37 रुपये की लागत
शोध दल ने बिजली और रसायनों की लागत को शामिल करते हुए इस सामग्री को तैयार करने की अनुमानित लागत करीब 37 रुपये प्रति ग्राम बताई है. शोध को फिलहाल प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर-4 तक पहुंचाया गया है. अब टीम इसका भौतिक नमूना विकसित करने के साथ व्यावहारिक उपयोग, लंबे समय तक काम करने की क्षमता और संचालन लागत का आकलन करेगी. इन परीक्षणों से यह समझने में मदद मिलेगी कि प्रयोगशाला में सफल रही यह तकनीक वास्तविक परिस्थितियों में कितनी प्रभावी साबित हो सकती है.
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