भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज रफ्तार से दौड़ने वाला देश बना रहेगा- UN की रिपोर्ट में दावा

New Delhi: दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे तेज रफ्तार से दौड़ने वाला देश बना रहेगा. संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. जहां एक तरफ पड़ोसी देश चीन की विकास दर धीमी पड़ रही है, वहीं भारत अपनी मजबूत घरेलू मांग, बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और बड़े पैमाने पर चल रहे बुनियादी ढांचा कार्यक्रमों के दम पर नए रिकॉर्ड बनाने को तैयार है.

भारत की आर्थिक रफ्तार जारी रहेगी

यूएनसीटीएडी (UNCTAD) की ‘व्यापार और विकास रिपोर्ट 2026: विकास का भू-अर्थशास्त्र’ के मुताबिक, कच्चे तेल के भारी आयात और वैश्विक दबावों के बावजूद भारत की आर्थिक रफ्तार जारी रहेगी. रिपोर्ट का अनुमान है कि 2026 (वित्त वर्ष 2027) में भारत की जीडीपी 7.3 फीसदी की दर से बढ़ेगी, जबकि 2027 (वित्त वर्ष 2028) में यह 6.8 फीसदी रह सकती है.

एशिया का योगदान 59 फीसदी रहने का अनुमान

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में अकेले एशिया का योगदान 59 फीसदी रहने का अनुमान है. भारत की विकास दर 7.3 फीसदी रहने का अनुमान है तो चीन की अर्थव्‍यवस्‍था महज 4.5 फीसदी की दर से बढ़ेगी. इंडोनेशिया आर्थिक विकास दर 5.2 फीसदी रहने का अनुमान है. भारतीय बाजार की सबसे बड़ी खूबी इसका अंदरूनी उपभोग है, जो बाहरी झटकों को आसानी से झेल लेता है.

भारत की घरेलू खपत 6.9 फीसदी

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भारत की घरेलू खपत 6.9 फीसदी और अगले वर्ष 5.6 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना है. हालांकि, बढ़ती लागत और महंगाई के चलते पिछले वर्षों की तुलना में खत की गति में हल्की नरमी देखी जा सकती है, लेकिन इसके बावजूद यह आंकड़ा अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और स्थिर है.

यूपीआई आधारित भुगतान मॉडल की सराहना

संयुक्त राष्ट्र ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और यूपीआई आधारित भुगतान मॉडल की सराहना की है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत एक प्रमुख तकनीकी केंद्र के रूप में भी उभर चुका है. भारत ने अपनी डिजिटल तकनीक साझा करने के लिए 23 देशों के साथ समझौते किए हैं, जिनमें से श्रीलंका और यूएई सहित आठ देशों में तकनीकी सहयोग पहले से संचालित हो रहा है. इसके जरिए भारत क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक एकीकरण को नई दिशा दे रहा है.

आर्थिक हालात को लेकर चिंता

संयुक्‍त राष्‍ट्री की इस रिपोर्ट में दुनिया भर के आर्थिक हालात को लेकर चिंता भी जताई गई है. यूएनसीटीएडी के अनुसार, 2026 में वैश्विक वृद्धि दर गिरकर 2.6 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 2.9 फीसदी थी. वहीं विकासशील देशों की औसत वृद्धि दर भी 4.7 फीसदी से घटकर 4 फीसदी पर आ सकती है.

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