Q3 GDP Growth: मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर लगभग 8.3% रहने का अनुमान है. यह तेजी मुख्य रूप से वस्तु एवं सेवा कर दरों में कटौती से बढ़ी खपत और मांग के कारण संभव मानी जा रही है, हालांकि पिछले वर्ष के उच्च आधार (बेस इफेक्ट) का प्रभाव भी इसमें दिखाई दे सकता है. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, FY26 की तीसरी तिमाही में सकल मूल्य वर्धन (GVA) वृद्धि दर करीब 8% तक पहुंच सकती है, जो पिछले साल की समान तिमाही के 6.5% से अधिक है, लेकिन दूसरी तिमाही के 8.1% से थोड़ा कम रहने की संभावना है.
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GDP आंकड़ों का अनुमान और नॉमिनल ग्रोथ
रिपोर्ट में कहा गया है, 27 फरवरी को जारी होने वाले वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े 8.3 प्रतिशत रह सकते हैं, जो पिछले साल की समान अवधि के 6.4 प्रतिशत से काफी अधिक है. रिपोर्ट के मुताबिक, नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर घटकर 8.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो दूसरी तिमाही के 8.7 प्रतिशत और पिछले वर्ष की समान अवधि के 10.3 प्रतिशत से कम है. इसकी वजह महंगाई में कमी के कारण जीडीपी डिफ्लेटर में गिरावट बताई गई है.
बेस ईयर को लेकर अनिश्चितता
बैंक ने कहा कि उसके अनुमान पुराने बेस ईयर पर आधारित हैं, क्योंकि सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा बेस ईयर में बदलाव के बाद GDP आंकड़ों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 के लिए आर्थिक वृद्धि का अनुमान फिलहाल मजबूत बना हुआ है और FY27 की शुरुआत के संकेत भी सकारात्मक नजर आ रहे हैं. हालांकि नए बेस ईयर को लेकर स्पष्टता आने के बाद वार्षिक अनुमानों की दोबारा समीक्षा किए जाने की संभावना है.
नए बेस ईयर के साथ जारी होंगे आंकड़े
इस बीच, सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MOSPI) शुक्रवार को संशोधित बेस ईयर 2022–23 के आधार पर नए जीडीपी आंकड़े जारी करेगा. सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि नई सीरीज के लिए वित्त वर्ष 2022–23 को आधार वर्ष चुना गया है. नए डेटा और इनपुट्स के जरिए संस्थागत क्षेत्रों—खासतौर पर निजी कंपनियों और एमएसएमई से जुड़े सेक्टर—में जीडीपी आकलन को अधिक सटीक और व्यापक बनाने की कोशिश की गई है, जहां पहले पर्याप्त आंकड़ों की कमी बनी हुई थी.

