Swami Avimukteshwaranand: यौन उत्पीड़न के मामले में फंसे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है. इससे पहले अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपना पक्ष रखा है. उनका कहना है कि झूठ की कलई खुलनी शुरू हो चुकी है और जल्द ही सारी सच्चाई जनता के सामने आने वाली है. उन्होंने आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज पर भी तीखा हमला बोला.
हमारे लिए हर दिन जरूरी है
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मीडिया के सामने आगे की कार्यवाही पर बात करते हुए कहा, “हमारे लिए हर दिन जरूरी है. हम लोगों को भी अपनी बात रखने का अधिकार है और हम न्यायालय में अपना पक्ष रख चुके हैं और उम्मीद है कि कोर्ट भी अपने विवेक के साथ फैसला सुनाएगा. इन लोगों की तरफ से पूरा प्रयास किया जाएगा कि न्याय न मिले और यह स्वाभाविक है, लेकिन हमारा मानना है कि झूठ की उम्र ज्यादा लंबी नहीं होती है. धीरे-धीरे झूठ की कलई खुल रही है. मामला धीरे-धीरे साफ होगा और लोगों को भी समझ आ जाएगा कि मामला में कितनी सच्चाई थी.
मेडिकल रिपोर्ट का कोई औचित्य नहीं Swami Avimukteshwaranand
सुनवाई को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि हमारे अधिवक्ता हमारा पक्ष रखेंगे और हम सारे साक्ष्य भी रखने के लिए तैयार हैं. बात यह भी है कि मेडिकल रिपोर्ट में हमारे संलिप्त होने की बात कैसे आ सकती है. वह लोग किस आधार पर हमारी संलिप्तता जांच रहे हैं. यह बात सब जानते हैं कि इतने महीने बाद की गई मेडिकल रिपोर्ट का कोई औचित्य नहीं है और दूसरा कि अगर उसके बच्चे के साथ कुछ ऐसा हुआ भी है तो कैसे साबित होगा कि हमारे द्वारा किया गया है? इसके लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ेगी, क्योंकि जो बच्चा कभी हमारे पास आया तक नहीं, उसका नाम हमसे जोड़ना सरल नहीं होगा.
बंद तो लाख की और खुल गई तो खाक की
उन्होंने आगे कहा, बच्चे आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज के साथ रह रहे हैं. बच्चे के माता-पिता तक ने नहीं कहा कि बच्चे को हमारे साथ रहने दो. क्यों बच्चों को होटल में रखा गया है और पत्रकारों से भी नहीं मिलने दिया जा रहा है? आखिर क्यों पुलिस इतना संरक्षण दे रही है? क्या वो उनके कहने पर काम कर रही है? वो हमेशा लैपटॉप की धमकी देते हैं. अगर सबूत है तो दुनिया के सामने पेश करें. हमारे यहां कहावत है, ‘बंद तो लाख की और खुल गई तो खाक की,’ मतलब जब तक मुट्ठी बंद है, तभी तक सारे राज अंदर हैं. अगर कुछ होता, तो कोर्ट के समक्ष पेश करते.”

