India Pension System Growth: भारत की रिटायरमेंट सुरक्षा व्यवस्था तेजी से मजबूत हो रही है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पेंशन योजनाओं में न सिर्फ निवेश (AUM) बढ़ा है, बल्कि करोड़ों नए लोग भी इस सिस्टम से जुड़े हैं. इससे साफ है कि देश में सामाजिक सुरक्षा का दायरा लगातार फैल रहा है.
NPS और APY में जबरदस्त ग्रोथ
सरकार के अनुसार, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत प्रबंधित संपत्ति बढ़कर 15.95 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है. वहीं अटल पेंशन योजना (APY) के तहत यह आंकड़ा 51,400 करोड़ रुपए हो गया है. सब्सक्राइबर्स की संख्या भी तेजी से बढ़ी है—NPS में 2.17 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं, जबकि APY में 8.96 करोड़ नामांकन दर्ज किए गए हैं. यह दर्शाता है कि लोग अब रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं.
EPS में भी तेज बढ़ोतरी
एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. अप्रैल 2026 तक इसमें योगदान देने वाले सदस्यों की संख्या बढ़कर 7.98 करोड़ हो गई है. यह संगठित क्षेत्र में बढ़ते रोजगार और सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार का संकेत देता है.
सामाजिक पेंशन योजनाओं का बढ़ता दायरा
गैर-अंशदायी सामाजिक पेंशन योजनाएं भी आय सहायता का एक अहम माध्यम बन गई हैं. अप्रैल 2026 तक केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत 2.92 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को कवर किया गया है. वहीं राज्य सरकारों ने भी 1.41 करोड़ से ज्यादा लोगों को पेंशन सहायता प्रदान की है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सीधा लाभ मिल रहा है.
डिफाइंड बेनेफिट सिस्टम अब भी अहम
भारत की पेंशन व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा अभी भी डिफाइंड-बेनेफिट मॉडल पर आधारित है. केंद्र सरकार के कर्मचारियों को इस व्यवस्था के तहत पेंशन दी जाती है, जिसमें 34 लाख से अधिक रक्षा पेंशनभोगी और 14 लाख रेलवे पेंशनभोगी शामिल हैं. यह प्रणाली लंबे समय से सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनी हुई है.
नीतिगत सुधार और डिजिटल फोकस
बढ़ती जीवन प्रत्याशा और बदलते रोजगार स्वरूप को देखते हुए रिटायरमेंट सुरक्षा को मजबूत करना अब सार्वजनिक नीति की प्राथमिकता बन गया है. इसी दिशा में सरकार लगातार नीतिगत फैसले और संस्थागत सुधार कर रही है. डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सेवाओं को बेहतर बनाने और ज्यादा लोगों तक पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
मल्टी-लेयर पेंशन सिस्टम
भारत की पेंशन व्यवस्था अब कई स्तंभों पर आधारित हो गई है. इसमें डिफाइंड बेनेफिट योजनाएं, अंशदायी पेंशन योजनाएं, निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए पेरोल आधारित स्कीम्स और कर से वित्तपोषित सामाजिक सहायता योजनाएं शामिल हैं. ये सभी मिलकर एक मजबूत और व्यापक रिटायरमेंट सुरक्षा ढांचा तैयार कर रहे हैं, जिससे अलग-अलग वर्गों के लोगों को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है.
NSAP से मिल रही अतिरिक्त मदद
केंद्र स्तर पर नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम (NSAP) ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लागू किया जा रहा है. इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को वित्तीय सहायता दी जाती है. अगस्त 2025 तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने लाभार्थियों को प्रति माह 50 रुपए से लेकर 3,800 रुपए तक की अतिरिक्त सहायता देना शुरू कर दिया है. इसके चलते अधिकांश राज्यों में औसत मासिक पेंशन लगभग 1,000 रुपए तक पहुंच गई है.
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