Poultry Industry: भारत का पोल्ट्री उद्योग आने वाले समय में मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकता है. केयरएज रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में देश के पोल्ट्री सेक्टर की आय 6 से 7 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है. इसके साथ ही उद्योग के परिचालन मार्जिन में भी 50 से 100 आधार अंक तक सुधार होने की उम्मीद जताई गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत मांग, बेहतर आपूर्ति व्यवस्था और उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी इस वृद्धि की प्रमुख वजहें होंगी.
वित्त वर्ष 26 में रहा स्थिर प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पोल्ट्री उद्योग का परिचालन प्रदर्शन स्थिर रहा. उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी के साथ रिटेल, संस्थागत और खाद्य सेवा (फूड सर्विस) क्षेत्र से मजबूत मांग देखने को मिली. इसके अलावा, मांग और आपूर्ति के बीच बेहतर संतुलन ने भी उद्योग के प्रदर्शन को मजबूती दी.
भारत बना दुनिया के बड़े उत्पादकों में शामिल
केयरएज रेटिंग्स का कहना है कि प्रोटीन युक्त भोजन की बढ़ती खपत, तेजी से हो रहे शहरीकरण, लोगों की बढ़ती क्रय क्षमता और खानपान की बदलती आदतों के कारण भारत दुनिया के सबसे बड़े अंडा और पोल्ट्री मांस उत्पादक देशों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है.
उत्पादकता बढ़ाने पर रहेगा जोर
रिपोर्ट में कहा गया है कि फीड कन्वर्जन रेश्यो (FCR) में सुधार, आधुनिक फार्म प्रबंधन तकनीकों को अपनाने और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर लगातार काम किया जा रहा है. इससे संगठित पोल्ट्री उद्योग की उत्पादकता बढ़ेगी और कंपनियों की प्रतिस्पर्धी क्षमता भी मजबूत होगी.
अंडे और मांस उत्पादन में बनी रहेगी तेजी
रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि बढ़ती प्रोटीन खपत, शहरीकरण और संगठित कंपनियों द्वारा उत्पादन क्षमता में लगातार विस्तार के कारण वित्त वर्ष 2026-27 में अंडे और पोल्ट्री मांस के उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी जारी रहेगी.
प्रोसेस्ड पोल्ट्री बाजार को मिलेगा फायदा
रिपोर्ट के मुताबिक, संगठित रिटेल, क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR), कोल्ड चेन नेटवर्क के विस्तार और निर्यात के बढ़ते अवसरों से प्रोसेस्ड पोल्ट्री उद्योग को भी मजबूती मिलेगी. इससे लंबे समय में उद्योग के लिए नए विकास के अवसर और मूल्य संवर्धन की संभावनाएं बढ़ेंगी.
नई तकनीक से बढ़ेगी क्षमता
रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्नत प्रजनन तकनीक, संतुलित पोषण, स्वचालन (ऑटोमेशन) और बेहतर फार्म प्रबंधन को अपनाने से उत्पादकता में और सुधार होगा. साथ ही फीड कन्वर्जन रेश्यो बेहतर होने से उत्पादन लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा.
संगठित कंपनियों को मिला ज्यादा फायदा
रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग में करीब 60 से 65 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली संगठित कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में बेहतर प्रदर्शन किया. एकीकृत परिचालन व्यवस्था, फीड की बेहतर खरीद और मजबूत मूल्य निर्धारण नीति के कारण इन कंपनियों के मुनाफे में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया.
मक्के की कीमतों में गिरावट से बढ़ा मार्जिन
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान घरेलू उत्पादन बढ़ने और आपूर्ति की स्थिति बेहतर होने से मक्के की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. चूंकि मक्का पोल्ट्री फीड का प्रमुख घटक है, इसलिए इसकी कीमत घटने से उद्योग की लागत कम हुई और कंपनियों के मार्जिन में सुधार आया. इसका सबसे अधिक फायदा उन एकीकृत कंपनियों को मिला, जिनके पास अपनी फीड मिल और मजबूत खरीद प्रणाली मौजूद है.
अंडा और पोल्ट्री उत्पादन में भारत की मजबूत स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अंडा उत्पादक और ब्रॉयलर मांस का प्रमुख उत्पादक देश है. वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान देश में 149.11 अरब अंडों का उत्पादन हुआ, जबकि पोल्ट्री मांस का उत्पादन लगभग 5.18 मिलियन टन रहा. यह भारत के कुल मांस उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा है, जो इस उद्योग की बढ़ती अहमियत को दर्शाता है.

