भारत की अधिकतम ऊर्जा मांग FY25-26 में बढ़कर 242.49 गीगावाट के स्तर पर पहुंच गई है. यह जानकारी सरकार ने शुक्रवार को साझा की. सरकार के अनुसार, ऊर्जा उत्पादन क्षमता और ट्रांसमिशन नेटवर्क के मजबूत विस्तार के चलते FY25-26 में बिजली की कमी घटकर महज 0.03% रह गई है, जो FY13-14 में 4.2% थी. ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि 30 नवंबर, 2025 तक देश की कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता बढ़कर 509.743 गीगावाट हो चुकी है, जबकि 31 मार्च, 2014 को यह 249 गीगावाट थी. इस दौरान देश की ऊर्जा क्षमता में कुल 104.4% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है.
भारत में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 1,460 kWh पहुंची
मंत्रालय ने बयान में कहा, भारत में प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत FY24-25 में बढ़कर 1,460 kWh हो गई है, जो कि FY13-14 की खपत 957 kWh के मुकाबले 52.6% (503 kWh) ज्यादा है. इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की औसत उपलब्धता 2014 में 12.5 घंटे से बढ़कर 22.6 घंटे हो गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में अब 2014 के 22.1 घंटे की तुलना में 23.4 घंटे तक बिजली की आपूर्ति होती है, जो बिजली सेवाओं की विश्वसनीयता और पहुंच में महत्वपूर्ण सुधार को दर्शाता है. अप्रैल 2014 से अब तक देश में बड़े जलविद्युत परियोजनाओं सहित कुल 178 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई है.
FY26 में 13.32 GW नई कोयला आधारित क्षमता का आवंटन
सरकार के मुताबिक, इसमें 130 गीगावाट सौर ऊर्जा, 33 गीगावाट पवन ऊर्जा, 3.4 गीगावाट बायोमास, 1.35 गीगावाट लघु जलविद्युत और करीब 9.9 गीगावाट बड़े जलविद्युत उत्पादन की क्षमता शामिल है, जो स्वच्छ ऊर्जा को लेकर भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है. ऊर्जा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की अनुमानित बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में (30 नवंबर, 2025 तक) 13.32 गीगावाट नई कोयला आधारित तापीय ऊर्जा क्षमता का आवंटन किया गया है.