210 टन का वजन, 33 फीट…, आज बिहार के मोतीहारी में स्थापित होगा दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग,कंबोडिया और कोलकाता से मंगवाए गए फूल

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Virat Ramayana Temple: बिहार के मोतिहारी स्थित विराट रामायण मंदिर में आज दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित किया जाएगा. इस शिवलिंग का वजन 210 टन, जबकि ऊंचाई व गोलाई 33 फीट है. ये शिवलिंग इतना भारी है कि इसे उठाने के लिए 2 क्रेन मंगाई गई है, इन क्रेनों की क्षमता 700 एवं 500 टन है. इस शिवलिंग के स्थापना कार्यक्रम में सीएम नीतीश कुमार भी शामिल होंगे.

देशभर के प्रमुख वैदिक विद्वानों को निमंत्रण

इस भव्य आयोजन में देशभर के प्रमुख तीर्थ स्थलों के विद्वान पंडितों को बुलाया गया है. पटना के महावीर मंदिर से सात पंडितों के साथ-साथ अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, हरिद्वार, गुजरात और महाराष्ट्र से वैदिक विद्वानों को निमंत्रण दिया गया है. सहस्रलिंगम स्थापना के लिए होने वाले यज्ञ में चारों वेदों के विशेषज्ञ शामिल होंगे.

भांग, धतूरा और बेल की 18 फीट लंबी माला तैयार

हरिद्वार, प्रयागराज, गंगोत्री, कैलाश मानसरोवर, सोनपुर सहित पांच पवित्र जल को लाकर अभिषेक किया जाएगा. विराट रामायण मंदिर को सजाने के लिए कंबोडिया और कोलकाता से फूल मंगवाए गए हैं. गुलाब, गेंदा और गुलदाउदी फूल पहले ही मंदिर परिसर पहुंच चुके हैं. शिवलिंग को सजाने के लिए 18 फीट लंबी माला को तैयार किया गया है, जिसमें फूलों के साथ-साथ भांग, धतूरा और बेल पत्र भी लगाए गए हैं.

विराट रामायण मंदिर के निर्माण के लिए पूर्वी चंपारण के कैथवलिया को ही चुनने को लेकर एक श्रद्धालु साधु ने बताया कि भगवान राम की शादी जनकपुर से होकर लौटने के दौरान एक रात्रि यही ठहराव हुआ था. इसके बाद गांव का नाम बहुआरा पड़ा (यानी राम की बहू के ठहराव होने को लेकर बहुआरा गांव बना). इसका प्रमाण रामजनकी पथ निर्माणाधीन है. वहीं विराट रामायण मंदिर के चौहद्दी में पूरब दिशा में बहुआरा गांव है.

क्‍या है शिवलिंग की खासियत?

बता दें कि 120 एकड़ में फैले मंदिर परिसर में कुल 22 मंदिर व 12 शिखर होंगे. मंदिर की लंबाई 1080 व चौड़ाई 540 वर्गफीट होगी. वहीं, सबसे ऊंचे शिखर की ऊंचाई 270 फीट होगी. इसके बाद एक शिखर 190, चार शिखर की ऊंचाई 180 फीट, एक शिखर की ऊंचाई 135 फीट, पांच शिखर की ऊंचाई 108 फीट होगी. परिसर की भव्यता देखने के लिए अभी से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं.

विराट रामायण मंदिर की एक और विशेषता ये है कि ये मंदिर प्रभु श्रीराम के नगर अयोध्या व माता सीता की जन्मभूमि नेपाल के धाम जनकपुर के बीच मोतिहारी के कैथवलिया के भूखंड पर तैयार हो रहा है. इसका नामकरण जानकी नगर के रूप में किया गया है. रामजनकी पथ निर्माण रास्ते से अयोध्या से इस मंदिर की दूरी 315 किलोमीटर है. जनकपुरधाम से करीब 115 किलोमीटर है.

अपनी भव्‍यता के वजह से संसार में होगा विख्‍यात

बिहार की राजधानी पटना से 120 किलोमीटर है. यानी अयोध्या से जनकपुरधाम के लिए बन रही रामजानकी पथ के किनारे जानकी नगर में यह मंदिर अपने स्थान संग अपनी भव्यता के लिए समस्त संसार में विख्यात होगा.

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