IndiGo पर महंगे तेल की मार, मध्य पूर्व तनाव से मुनाफे पर बढ़ा दबाव

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

IndiGo Profit Impact: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब एविएशन सेक्टर पर भी दिखने लगा है. बजट एयरलाइन इंडिगो के मुनाफे पर नजदीकी अवधि में दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है. मूडीज रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल और जेट ईंधन की कीमतों में तेजी के चलते एयरलाइन के मार्जिन पर असर पड़ सकता है.

ईंधन की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

रिपोर्ट में बताया गया है कि इंडिगो ईंधन की कीमतों को हेज नहीं करती है, जिससे अचानक बढ़ी कीमतों का सीधा असर उसके खर्च पर पड़ता है. ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई हैं, जो पिछले साल के औसत से लगभग 45 प्रतिशत अधिक है. वहीं जेट ईंधन की कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं, जिससे एयरलाइंस की लागत में इजाफा हुआ है.

मध्य पूर्व तनाव का असर

28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है. इसके चलते कुछ हवाई मार्ग प्रभावित हुए हैं और कई क्षेत्रों में एयरस्पेस बंद कर दिया गया है. इस वजह से एयरलाइंस को लंबी दूरी के वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे ईंधन खर्च और बढ़ रहा है.

मुनाफे पर कितना असर

मूडीज के मुताबिक, जेट ईंधन की कीमत में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से इंडिगो का मासिक खर्च करीब 20-25 करोड़ रुपए बढ़ जाता है. हालांकि टिकट बुकिंग साइकिल 30-45 दिन की होने के कारण एयरलाइन समय के साथ बढ़ी हुई लागत को यात्रियों पर ट्रांसफर कर सकती है.

घरेलू बाजार से मिल रही राहत

इंडिगो की भारत के घरेलू विमानन बाजार में मजबूत पकड़ है. कंपनी की लगभग 64 प्रतिशत हिस्सेदारी है और उसका करीब तीन-चौथाई राजस्व घरेलू उड़ानों से आता है. यह मजबूत स्थिति उसे अंतरराष्ट्रीय तनाव के असर से कुछ हद तक बचाने में मदद कर रही है.

आगे की रणनीति

रिपोर्ट के अनुसार, इंडिगो ने कुछ यूरोपीय मार्गों पर वैकल्पिक रूट के जरिए उड़ानें फिर से शुरू करने की कोशिश की है, हालांकि अभी सीमित सफलता मिली है. अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो एयरलाइन घरेलू मार्गों पर फोकस बढ़ाने या दक्षिण-पूर्व एशिया में विस्तार करने का विकल्प अपना सकती है.

चुनौतियां बरकरार

मूडीज ने चेतावनी दी है कि इंडिगो को आगे भी ईंधन की ऊंची कीमत, लंबी उड़ान अवधि और रुपये की कमजोरी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

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