Maruti Suzuki ने खरखौदा प्लांट में शुरू किया 1 MWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, हर साल 54 टन कार्बन उत्सर्जन होगा कम

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Maruti Suzuki BESS: देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने हरित ऊर्जा की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने बुधवार को हरियाणा स्थित अपने खरखौदा विनिर्माण संयंत्र में 1 MWh क्षमता का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) शुरू करने की घोषणा की. कंपनी के मुताबिक, यह पहल नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की उसकी रणनीति का हिस्सा है.

इस सिस्टम की खास बात यह है कि खरखौदा प्लांट में पैदा होने वाली अतिरिक्त सौर ऊर्जा अब बेकार नहीं जाएगी. कम मांग या छुट्टी के दिनों में बचने वाली बिजली को बैटरी सिस्टम में स्टोर किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सकेगा. कंपनी का कहना है कि इससे सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करने के साथ बिजली ग्रिड की स्थिरता मजबूत करने में भी मदद मिलेगी.

पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुआ BESS

मारुति सुजुकी के अनुसार, 1 MWh क्षमता वाले बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम को फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है. इसे खरखौदा संयंत्र के आंतरिक बिजली वितरण नेटवर्क से जोड़ा गया है. इसका मुख्य उद्देश्य प्लांट में उत्पन्न होने वाली सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करना है. कंपनी अपनी विनिर्माण गतिविधियों में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में काम कर रही है.

2025 में शुरू की थी 20 MWp की सौर ऊर्जा परियोजना

मारुति सुजुकी ने वर्ष 2025 में खरखौदा संयंत्र में 20 MWp क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना शुरू की थी. हालांकि, प्लांट की छुट्टियों या कम मांग वाले समय में सोलर प्लांट से पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता था. इसी समस्या के समाधान के लिए नया बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम शुरू किया गया है. कंपनी के अनुसार, BESS अतिरिक्त बिजली को स्टोर करेगा और जरूरत के समय उसका उपयोग किया जाएगा.

सौर ऊर्जा का होगा बेहतर इस्तेमाल

कंपनी ने बताया कि नया BESS सिस्टम प्लांट में बनने वाली अतिरिक्त सौर ऊर्जा को संग्रहित करेगा. बाद में बिजली की जरूरत बढ़ने पर इस स्टोर की गई ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा सकेगा. इससे न केवल सौर ऊर्जा का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि बिजली ग्रिड की स्थिरता को भी मजबूत करने में मदद मिलेगी. यह व्यवस्था कंपनी के नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

हर साल 54 टन CO2 उत्सर्जन में आएगी कमी

मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ हिसाशी ताकेउची ने कहा कि कंपनी भारत में आत्मनिर्भर हरित ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के प्रयासों में लगातार योगदान दे रही है. उन्होंने कहा, “खरखौदा संयंत्र में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की शुरुआत इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.” उनके अनुसार, लगभग 15 वर्ष के जीवनकाल वाले इस सिस्टम से हर साल करीब 54 टन कार्बन डाइऑक्साइड यानी CO2 उत्सर्जन में कमी आएगी.

उत्पादन बढ़ेगा, लेकिन उत्सर्जन कम करने पर भी जोर

हिसाशी ताकेउची ने कहा कि आने वाले वर्षों में कंपनी का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है. इसके साथ ही कंपनी विनिर्माण गतिविधियों से होने वाले स्कोप-1 और स्कोप-2 कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी कार्बन इंटेंसिटी और कुल उत्सर्जन, दोनों स्तरों पर कमी लाने की दिशा में काम करेगी.

2030-31 तक 42 प्रतिशत कमी का लक्ष्य

कंपनी की यह रणनीति उसकी मूल कंपनी सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के पर्यावरणीय विजन के अनुरूप है. इसके तहत वित्त वर्ष 2030-31 तक वित्त वर्ष 2023 की तुलना में स्कोप-1 और स्कोप-2 कार्बन उत्सर्जन में 42 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है.

जुलाई की शुरुआत में हुआ था आधुनिक प्लांट का उद्घाटन

उल्लेखनीय है कि जुलाई की शुरुआत में मारुति सुजुकी ने हरियाणा के IMT खरखौदा में अपने सबसे आधुनिक वाहन विनिर्माण संयंत्र का उद्घाटन किया था. इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राष्ट्र को समर्पित किया था.

करीब 800 एकड़ में फैला है विनिर्माण परिसर

खरखौदा का यह एकीकृत विनिर्माण परिसर करीब 800 एकड़ में फैला हुआ है. इसे सप्लायर पार्क के साथ विकसित किया गया है. पूरी क्षमता से संचालन शुरू होने पर इस परिसर को दुनिया के सबसे बड़े वाहन निर्माण केंद्रों में शामिल किया जाएगा. अब इसी संयंत्र में 1 MWh क्षमता वाले BESS की शुरुआत कंपनी की हरित ऊर्जा रणनीति को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

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