Monsoon Update: देश में मानसून की स्थिति पिछले कुछ महीनों के मुकाबले बेहतर हुई है. बारिश में सुधार का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी दिखाई दे रहा है. ऐसे में खरीफ उत्पादन को बड़े नुकसान की आशंका अब पहले की तुलना में कम हो गई है. हालांकि, बारिश का वितरण अभी भी अहम बना हुआ है और कुछ इलाकों की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है.
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 19 अगस्त तक देश में संचयी बारिश की कमी घटकर 12.6% रह गई है. जून में यह कमी 35% थी. यानी पिछले कुछ समय में मानसूनी बारिश की स्थिति में काफी सुधार हुआ है. रिपोर्ट में कहा गया, “स्थिति में सुधार हो रहा है, हालांकि यह पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है.”
खरीफ फसलों की बुवाई में भी सुधार
मानसून की कमजोर शुरुआत का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ा था, लेकिन बाद में बारिश की स्थिति सुधरने के साथ बुवाई की रफ्तार भी बेहतर हुई है. मैक्वायरी के मुताबिक, 14 अगस्त तक कुल खरीफ बुवाई पिछले साल के स्तर से 2% कम थी. जून के अंत में यह अंतर 21% था.
इससे साफ है कि बुवाई में शुरुआती कमी काफी हद तक कम हुई है. फसलों की बात करें तो धान का रकबा पिछले साल की तुलना में 3.7% कम रहा है. वहीं मक्का की बुवाई का रकबा 4 प्रतिशत घटा है. इसके उलट दलहन, तिलहन, गन्ना और कपास का रकबा पिछले साल के स्तर के करीब बना हुआ है. इन फसलों में कमी करीब 1 प्रतिशत के दायरे में रही.
कुछ इलाकों पर अभी भी नजर जरूरी
मैक्वायरी ने कहा है कि खरीफ बुवाई में जो कमी बची हुई है, वह मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा फसलों तक सीमित है. इसे व्यापक स्तर की गिरावट नहीं माना जा रहा है. इसके अलावा जलाशयों में पर्याप्त पानी भी किसानों और खरीफ उत्पादन के लिए राहत की स्थिति बना रहा है.
महाराष्ट्र और गुजरात के जलाशयों में पानी का भंडारण 10 साल के औसत स्तर के बराबर या उससे अधिक है. यूपी, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में भी जल भंडारण उनके संबंधित औसत स्तर का करीब 80-100% है. हालांकि, बिहार और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में स्थिति पर अभी करीबी नजर रखने की जरूरत बताई गई है.
खरीफ उत्पादन को लेकर जोखिम हुआ कम
रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून में सुधार, खरीफ फसलों की बुवाई में सीमित कमी और जलाशयों में पर्याप्त पानी ने मिलकर खरीफ उत्पादन में बड़ी गिरावट के जोखिम को कम कर दिया है. मानसून में सुधार का असर महंगाई के मोर्चे पर भी सकारात्मक माना जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, जून के मुकाबले खाद्य आपूर्ति और महंगाई से जुड़े जोखिम अब कम हो रहे हैं.
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