मार्च में 11% बढ़ा इक्विटी फंड में निवेश; मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रा और डिफेंस सेक्टर बने निवेशकों की पहली पसंद

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में मार्च 2026 के दौरान निवेश के रुझानों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इक्विटी फंड्स में निवेश यानी नेट फ्लो बढ़कर 46,501 करोड़ रुपए हो गया है, जो फरवरी के 41,934 करोड़ रुपए के मुकाबले करीब 11 प्रतिशत ज्यादा है. यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि हाल के दिनों में शेयर बाजार में आई तेजी ने निवेशकों का भरोसा फिर से इक्विटी की ओर बढ़ाया है.

इक्विटी में निवेश क्यों बढ़ा

वैलम कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में कुल नेट एसेट फ्लो के पैटर्न में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला. निवेशकों ने मनी मार्केट और फिक्स्ड इनकम फंड्स से पैसा निकालकर इक्विटी फंड्स में निवेश बढ़ाया, जिससे बाजार में नई ऊर्जा देखने को मिली. भारतीय शेयर बाजार में आई तेज रिकवरी ने निवेशकों को आकर्षित किया और इसी के चलते करीब 59,629 करोड़ रुपए का निवेश इक्विटी बाजार में आया. बाजार के अलग-अलग सेगमेंट में भी मजबूती देखने को मिली, जहां स्मॉल-कैप, मिड-कैप और लार्ज-कैप सभी श्रेणियों में बढ़त दर्ज की गई.

हालांकि, साल की शुरुआत से अब तक का कुल प्रदर्शन अभी भी पूरी तरह सकारात्मक नहीं हो पाया है और कई कैटेगरी में रिटर्न नकारात्मक बने हुए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में स्थिरता अभी पूरी तरह नहीं आई है.

मनी मार्केट और डेट फंड्स से भारी निकासी

मार्च के दौरान सबसे बड़ा बदलाव मनी मार्केट फंड्स में देखने को मिला, जहां निवेशकों ने बड़े पैमाने पर पैसा निकाला. फरवरी में जहां इन फंड्स में 42,800 करोड़ रुपए का इनफ्लो था, वहीं मार्च में यह आंकड़ा गिरकर -1,94,775 करोड़ रुपए हो गया.

इसी तरह फिक्स्ड इनकम फंड्स में भी निवेशकों का रुझान कमजोर रहा और यहां से आउटफ्लो बढ़कर -76,354 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो फरवरी में -16,919 करोड़ रुपए था. यह साफ संकेत है कि निवेशक ब्याज दरों को लेकर सतर्क हैं या फिर कम रिटर्न वाले विकल्पों से पैसा निकालकर इक्विटी की ओर रुख कर रहे हैं.

कुल नेट एसेट फ्लो में गिरावट क्यों आई

हालांकि इक्विटी फंड्स में निवेश बढ़ा है, लेकिन कुल नेट एसेट फ्लो में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. फरवरी में जहां यह आंकड़ा 73,589 करोड़ रुपए था, वहीं मार्च में यह बदलकर -2,20,797 करोड़ रुपए हो गया. इस गिरावट का मुख्य कारण मनी मार्केट फंड्स से भारी निकासी रहा, जिसने पूरे इंडस्ट्री के आंकड़ों को नकारात्मक दिशा में धकेल दिया.

कमोडिटी फंड्स में धीमी रफ्तार

कमोडिटी फंड्स में निवेश सकारात्मक बना रहा, लेकिन इसमें पहले जैसी तेजी नहीं देखी गई. सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ती नजर आई, जिससे यह संकेत मिलता है कि निवेशकों का फोकस फिलहाल अन्य एसेट क्लास की ओर बढ़ रहा है.

ग्लोबल ट्रेंड का असर

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर डॉलर की कमजोरी और अमेरिका से निवेश के रुख में बदलाव का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है. थीमैटिक ईटीएफ में सेमीकंडक्टर और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे टेक्नोलॉजी आधारित निवेश को बढ़ावा मिल रहा है.

भारत में बदलती निवेश प्राथमिकताएं

भारत में भी निवेशकों की प्राथमिकताओं में बदलाव देखने को मिल रहा है. वर्ष 2026 के दौरान मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस सेक्टर निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं.

पहले जहां पीएसयू और कंजंप्शन सेक्टर में ज्यादा निवेश देखा जाता था, अब निवेशकों का झुकाव धीरे-धीरे इन नए सेक्टर्स की ओर बढ़ रहा है, जो अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों को दर्शाता है.

लार्ज-कैप और अन्य फंड्स में बढ़त

मार्च में निवेशकों ने अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले लार्ज-कैप फंड्स में भी ज्यादा निवेश किया. इन फंड्स में 28,558 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जो फरवरी की तुलना में 19,242 करोड़ रुपए ज्यादा है. इसके साथ ही फ्लेक्सी-कैप और मिड-कैप फंड्स में भी निवेश जारी रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि निवेशक संतुलित रणनीति अपना रहे हैं.

हालांकि, दूसरी ओर आर्बिट्राज फंड्स से 22,182 करोड़ रुपए की निकासी हुई और डायनेमिक स्ट्रैटेजी फंड्स से भी पूंजी का नुकसान हुआ, जिससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं.

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