भारतीय शेयर बाजार में सुधार के शुरुआती संकेत दिखाई दे रहे हैं और सामान्य परिस्थितियों (बेस केस) में निफ्टी अगले 12 महीनों में लगभग 27,958 के स्तर तक पहुंच सकता है. यह अनुमान बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में जताया गया है. पीएल कैपिटल के अनुसार, यदि बाजार में तेजी का माहौल बनता है और फॉरवर्ड अर्निंग्स मल्टीपल 20 गुना तक पहुंचता है, तो निफ्टी 30,497 के स्तर को छू सकता है. वहीं, कमजोर बाजार परिस्थितियों (बेयरिश स्थिति) में यह सूचकांक करीब 26,486 के आसपास रह सकता है. यहां बेस केस का अर्थ सामान्य बाजार स्थिति, बुलिश का मतलब तेजी और बेयरिश का अर्थ कमजोरी से है.
आय वृद्धि और कंपनियों का मजबूत प्रदर्शन
कंपनी ने कहा कि प्रति शेयर आय (EPS) में 3.8% की वृद्धि की उम्मीद है और FY26–28 के दौरान अनुमानित 16.3% CAGR के साथ मध्यम अवधि में आय का रुझान मजबूत बना हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार कंपनियों का प्रदर्शन भी बेहतर बना हुआ है, जिसमें बिक्री, EBITDA और कर पश्चात लाभ में क्रमशः 9.9%, 16.4% और 16.7% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि नीतिगत स्पष्टता, महत्वपूर्ण व्यापार समझौते और बुनियादी ढांचे के लगातार विकास के कारण भारत की विकास यात्रा निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही है, जिससे विस्तार के अगले दौर की नींव तैयार हो रही है.
समेकन के बाद बढ़ा बाजार में आशावाद
रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय से चल रहे कंसोलिडेशन के बाद अब बाजार में नए उत्साह के संकेत दिखाई दे रहे हैं. आय अनुमानों में कुछ बदलाव के बावजूद बाजार के मूलभूत कारक मजबूत बने हुए हैं. पीएल कैपिटल के संस्थागत इक्विटी अनुसंधान निदेशक अम्निश अग्रवाल के अनुसार, भारत चक्रीय सुधार के दौर से निकलकर दीर्घकालिक रूप से मजबूत विकास पथ की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि पूंजी निर्माण में तेजी और उत्पादकता में सुधार के साथ भारतीय शेयर बाजार बहुवर्षीय चक्रवृद्धि वृद्धि के शुरुआती चरण में प्रवेश कर सकता है.
भारत-EU व्यापार समझौते से कई क्षेत्रों को फायदा
रिपोर्ट में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को भी भविष्य की वृद्धि के लिए अहम बताया गया है. इसके तहत वस्त्र एवं परिधान, समुद्री उत्पाद, चमड़ा व जूते, रत्न-आभूषण, रसायन, मशीनरी और विद्युत उपकरण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है. फर्म का कहना है कि समुद्री निर्यात, चमड़े के उत्पाद और रत्न जैसे रोजगार सृजन से जुड़े क्षेत्रों में मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. इसके अलावा पूंजीगत वस्तु और इंजीनियरिंग कंपनियां भी अवसंरचना और रक्षा क्षेत्र में बढ़ते निवेश का फायदा उठा सकती हैं.