Petrol Diesel Price Today: कच्चा तेल 108 डॉलर के पार, फिर भी नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, जानें शहरवार रेट

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Petrol Diesel Price Today: अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. इसके बावजूद सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने फिलहाल घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है. देश में पेट्रोल-डीजल के दाम में आखिरी बार 25 मई को बदलाव हुआ था. उस समय पेट्रोल की कीमत में 2.7 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी.

भारत में डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग मेथड लागू है. इसके तहत तेल कंपनियां हर दिन सुबह 6:00 बजे पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी करती हैं. हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में होने वाले मामूली उतार-चढ़ाव का असर घरेलू कीमतों पर तुरंत देखने को नहीं मिलता और कई बार कंपनियां कीमतों को स्थिर रखती हैं. यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल के दाम में बदलाव हुए तीन महीने से ज्यादा समय बीत चुका है.

शहरवार चेक करें पेट्रोल-डीजल की कीमत

शहर पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर) डीजल की कीमत (प्रति लीटर)
दिल्ली 102.12 रुपये 95.20 रुपये
मुंबई 111.31 रुपये 97.97 रुपये
कोलकाता 113.51 रुपये 99.82 रुपये
चेन्नई 107.78 रुपये 99.56 रुपये
गुरुग्राम 102.97 रुपये 95.94 रुपये
पटना 113.35 रुपये 99.36 रुपये
नागपुर 111.90 रुपये 98.20 रुपये
श्रीनगर 104.10 रुपये 92.81 रुपये
इंदौर 114.32 रुपये 99.41 रुपये

आज क्रूड ऑयल की कीमत

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. आज ब्रेंट क्रूड करीब 108.23 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है. पिछले एक हफ्ते में इसकी कीमत में करीब 6 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी तेजी के साथ 103.80 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय तक जंग जारी रहने की आशंका ने ग्लोबल ऑयल मार्केट में जोखिम बढ़ा दिया है. जुलाई के बाद पहली बार 9 सितंबर को ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर के ऊपर यानी तीन अंकों में बंद हुई.

भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 80-85 फीसदी हिस्सा आयात करता है. ऐसे में मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और होर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका भारत के लिए चिंता बढ़ा सकती है. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने पर भारत को तेल आयात के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है और रुपये की कीमत भी कमजोर हो सकती है. फिलहाल तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखा है. हालांकि, अगर लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमत ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो इसका असर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट पर पड़ सकता है. परिवहन महंगा होने की स्थिति में फल, सब्जियों और रोजमर्रा की दूसरी जरूरी चीजों की कीमतों पर भी दबाव देखने को मिल सकता है.

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