LPG Supply: होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के पास अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ने के बीच भारत ने LPG सप्लाई को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. आने वाले समय में सप्लाई में किसी तरह की रुकावट न आए, इसके लिए देश में LPG का उत्पादन करीब 4,000 टन प्रतिदिन बढ़ाया जा रहा है. इस कदम का मकसद होर्मुज स्ट्रेट से होकर आने वाले पारंपरिक शिपिंग रूट पर भारत की निर्भरता को कम करना है. होर्मुज के आसपास मौजूदा अस्थिर माहौल को देखते हुए भारत अपनी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सप्लाई को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.
देश की रिफाइनरियां पहले से ही अपने सामान्य उत्पादन स्तर से ज्यादा क्षमता पर काम कर रही हैं. सामान्य तौर पर रिफाइनरियों का LPG उत्पादन 37,000 से 38,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन रहता है, लेकिन अब इसमें करीब 4,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन की और बढ़ोतरी की जा रही है. इस अतिरिक्त उत्पादन के बाद रिफाइनरियों का LPG उत्पादन सामान्य बेस लेवल की तुलना में 10 फीसदी से भी ज्यादा ऊपर पहुंच जाएगा. सरकार का फोकस घरेलू बाजार में LPG की उपलब्धता बनाए रखने और अंतर्राष्ट्रीय सप्लाई रूट में किसी संभावित बाधा के असर को कम करने पर है.
खाड़ी देशों पर कम हुई निर्भरता
भारत लंबे समय से अपनी LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता रहा है. यूएई, कतर, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों से भारत करीब 90 फीसदी LPG आयात करता था और इसकी सप्लाई मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होती थी. अब होर्मुज के आसपास तनाव बढ़ने के कारण सरकार और तेल कंपनियां LPG आयात के लिए वैकल्पिक रास्तों और स्रोतों पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं.
इसी वजह से भारत के LPG इंपोर्ट पैटर्न में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अब भारत के LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा हो गई है. वहीं, 2026 की शुरुआत में तनाव बढ़ने से पहले भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 10 फीसदी से भी कम थी.
छह महीने में अमेरिका बना बड़ा LPG सोर्स
मार्च से अगस्त के बीच छह महीनों के दौरान भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर 53 फीसदी तक पहुंच गई. इसके मुकाबले ईरान में जंग शुरू होने से पहले भारत अपनी LPG जरूरत का सिर्फ 7.9 फीसदी हिस्सा अमेरिका से आयात करता था. हालांकि, अमेरिका से LPG मंगाने के साथ लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ी हैं. पहले खाड़ी देशों से LPG लेकर आने वाले टैंकरों को भारत पहुंचने में करीब 3 से 4 दिन का समय लगता था. अब अमेरिका के ह्यूस्टन से LPG लेकर आने वाले जहाजों को पनामा नहर या अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ के रास्ते भारत पहुंचने में करीब 30 से 45 दिन लग रहे हैं.
लंबे समुद्री रास्ते के कारण माल ढुलाई के साथ-साथ स्टोरेज की लागत भी बढ़ गई है. इसके बावजूद भारत सप्लाई के जोखिम को कम करने के लिए अमेरिका से LPG आयात बढ़ा रहा है.
2027 के आयात को लेकर भी तैयारी
LPG सप्लाई की लंबी अवधि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियों को भी निर्देश दिए हैं. कंपनियों से कहा गया है कि वे 2027 में होने वाले अपने कुल LPG आयात का कम से कम 15 फीसदी से 25 फीसदी हिस्सा अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं के साथ सालाना अनुबंध (Annual Contracts) के जरिए पहले ही सुरक्षित कर लें. इस रणनीति के जरिए भारत एक तरफ घरेलू LPG उत्पादन बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ आयात के स्रोतों में भी विविधता ला रहा है, ताकि होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी किसी संभावित सप्लाई बाधा का सीधा असर देश के LPG बाजार पर न पड़े.
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