PLI Scheme News: भारत के ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक इस योजना के तहत ₹44,326 करोड़ का निवेश आकर्षित किया जा चुका है. यह राशि मार्च 2027 तक तय किए गए ₹42,500 करोड़ के लक्ष्य से भी अधिक है.
तय समय से पहले पूरा हुआ निवेश लक्ष्य
मंत्रालय ने बताया कि ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए पीएलआई योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2021 को ₹25,938 करोड़ के बजटीय प्रावधान के साथ की गई थी. इस योजना का उद्देश्य देश में उन्नत ऑटोमोबाइल तकनीक के निर्माण को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है. सरकार के अनुसार, योजना के तहत चयनित कंपनियों ने अब तक ₹44,326 करोड़ का संचयी निवेश किया है, जो निर्धारित लक्ष्य से अधिक है. इससे देश में आधुनिक ऑटोमोबाइल तकनीक के विकास और विनिर्माण को नई गति मिली है.
पश्चिम बंगाल में 463 ईवी चार्जिंग स्टेशन शुरू
इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से फेम-II योजना के तहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) को पश्चिम बंगाल में 482 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की मंजूरी दी गई थी. मंत्रालय के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 तक इनमें से 463 चार्जिंग स्टेशन चालू हो चुके हैं. हालांकि, राज्य में मौजूदा चार्जिंग नेटवर्क पर्याप्त है या नहीं, इसका अभी तक कोई औपचारिक आकलन नहीं किया गया है.
पीएम ई-ड्राइव योजना में मथुरापुर शामिल नहीं
मंत्रालय ने बताया कि पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में मथुरापुर के लिए किसी ईवी चार्जिंग स्टेशन का प्रस्ताव शामिल नहीं है. हालांकि, दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग, बक्खाली, डायमंड हार्बर, काकद्वीप और नामखाना में पांच सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का प्रस्ताव भेजा गया है. सरकार ने स्पष्ट किया कि पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत अब तक पश्चिम बंगाल को किसी प्रकार की वित्तीय सहायता जारी नहीं की गई है.
पूरे देश के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान
भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार, देशभर में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए फेम-II योजना के तहत ₹912.50 करोड़ और पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है. यह राशि पूरे देश के लिए निर्धारित है और किसी एक राज्य के लिए अलग से आवंटित नहीं की जाती.
बिना लाइसेंस लगाए जा सकते हैं ईवी चार्जिंग स्टेशन
मंत्रालय ने दोहराया कि देश में ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना लाइसेंस-मुक्त गतिविधि है. यानी सरकारी एजेंसियां, निजी कंपनियां और अन्य संस्थान बिना किसी लाइसेंस के सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित कर सकते हैं, उनका संचालन कर सकते हैं और रखरखाव भी कर सकते हैं.
यह भी पढ़े: FBI ने भारतीय नागरिक अमृतपाल सिंह को शामिल किया मोस्ट वांटेड लिस्ट में