Quick Commerce: भारत में क्विक कॉमर्स का कारोबार आने वाले वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है. वित्त वर्ष 2026 में करीब 13 अरब डॉलर का यह बाजार वित्त वर्ष 2031 तक बढ़कर 90 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. इसके साथ ही देशभर में हर महीने क्विक कॉमर्स के जरिए लेनदेन करने वाले यूजर्स की संख्या 10 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है. बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई.
गूगल और रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, निकट अवधि में क्विक कॉमर्स मार्केट में तेजी बनी रहने की संभावना है. इस त्योहारी सीजन में क्विक कॉमर्स की बिक्री सालाना आधार पर 110 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है. इसके साथ ही ऑनलाइन त्योहारी खर्च में क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.
मेट्रो शहरों से मिलेगी बड़ी ग्रोथ
रिपोर्ट में कहा गया है कि क्विक कॉमर्स की निकट अवधि की ग्रोथ को खास तौर पर मेट्रो शहरों में बढ़ते वॉलेट शेयर और तेजी से बढ़ती यूजर संख्या से मजबूती मिल रही है. वित्त वर्ष 2031 तक क्विक कॉमर्स की अतिरिक्त वृद्धि में मेट्रो शहरों की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत रहने का अनुमान है. मेट्रो शहरों के कुल रिटेल खर्च में क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी भी मौजूदा करीब 6 प्रतिशत से बढ़कर 20 से 23 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. इसी अवधि में मेट्रो शहरों में क्विक कॉमर्स यूजर्स की संख्या 2.8 करोड़ से लगभग दोगुनी होकर करीब 5 करोड़ होने का अनुमान है.
किराना से आगे बढ़ेगा क्विक कॉमर्स
शहरी खरीदारी की आदतों में अपनी मजबूत जगह बनाने के बाद क्विक कॉमर्स अब कैटेगरी और भौगोलिक विस्तार के बड़े चरण में प्रवेश कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस अगले चरण की ग्रोथ का फायदा उठाने के लिए प्लेटफॉर्म और ब्रांड्स को किराना सेगमेंट में और गहराई तक पहुंच बनानी होगी. इसके लिए ग्राहकों को केवल जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सामान मंगाने वाले ‘टॉप-अप ऑर्डर’ से आगे बढ़ाकर हर महीने घर के राशन और पेंट्री की नियमित खरीदारी की ओर ले जाना होगा.
ग्राहकों को दोबारा ऑर्डर के लिए करना होगा प्रेरित
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रांड्स को सामान की ताजगी, सप्लाई चेन में पारदर्शिता और बड़े पैक की उपलब्धता पर ध्यान देना होगा. इसके अलावा कीमत के लिहाज से बेहतर पैकिंग का फायदा भी ग्राहकों तक पहुंचाना जरूरी होगा. प्लेटफॉर्म और ब्रांड्स लक्षित रीप्लेनिशमेंट मार्केटिंग और दोबारा ऑर्डर करने के लिए रिमाइंडर का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसका मकसद ग्राहकों के बीच नियमित रूप से सामान दोबारा मंगाने की आदत विकसित करना होगा.
मेट्रो और गैर-मेट्रो शहरों में बदल रहा खरीदारी का तरीका
गूगल इंडिया में क्विक कॉमर्स और फूडटेक के इंडस्ट्री हेड करण दुगल ने कहा कि भारत में क्विक कॉमर्स अब किसी एक तरह के बिजनेस मॉडल तक सीमित नहीं है. मेट्रो और गैर-मेट्रो शहरों में लोगों के खरीदारी करने के तरीके में तेजी से बदलाव आ रहा है. उन्होंने कहा कि इस बदलाव में रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं से लेकर महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स तक कई तरह के सामान शामिल हैं.
करण दुगल के मुताबिक, जैसे-जैसे इंडस्ट्री हर महीने लेनदेन करने वाले 10 करोड़ यूजर्स के महत्वपूर्ण पड़ाव की ओर बढ़ रही है, सफलता उन ब्रांड्स को मिलेगी जो ग्राहकों के बीच मौजूद छोटे-छोटे अंतर और बारीकियों को समझते हैं. उन्होंने कहा कि गूगल ब्रांड्स को बड़े स्तर पर आगे बढ़ने में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है. इसमें पहली बार खरीदारी करने वाले ग्राहकों के साथ मजबूत भरोसा कायम करना, पुराने ग्राहकों को सटीक तरीके से दोबारा जोड़ना और लंबे समय तक ब्रांड के प्रति वफादारी विकसित करना शामिल है.
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